जम्मू-कश्मीरः राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पीएम मोदी से मुलाकात कर राज्य के हालात की दी जानकारी

जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं लेकिन पाकिस्तान को ये रास नहीं आ रहा…इसीलिए सीमा पार से बड़ी तादाद में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की फिराक़ में है…इसके मद्देनज़र आज गृह मंत्री अमित शाह ने एक अहम बैठक कर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की…अब घाटी के ज़्यादातर हिस्सों से प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिए गए है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से कहा है की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये सुनिश्चित करे की राज्य में सामान्य जनजीवन बहाल हो…

जम्मू-कश्मीर में स्थिति तेजी से सामान्य होती जा रही है। घाटी के अधिकांश हिस्सों से अब प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिया गया है। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सोमवार को पीएम मोदी से मुलाकात कर राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति की जानकारी दी। दूसरी तरह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अहम बैठक कर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। दो घंटे तक चली इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह सचिव राजीव गौबा सहित मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह को जम्मू-कश्मीर खासकर अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। दरअसल ये बैठक खुफिया रिपोर्ट के आलोक में बुलाई गई थी जिसमें कहा गया था कि सीमा पर घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लगभग 200 से अधिक आतंकवादियों को लॉन्च पैड पर लाया गया है। कश्मीर घाटी की सुरक्षा स्थिति देखने वाली 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी हाल के दिनों में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों की पुष्टि की थी।

इसबीच, नेशनल कांफ्रेंस नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री फारूक अब्दुल्ला को कथित तौर पर नज़र बंद रखने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने याचिका में किए गए दावों का खंडन किया।

दूसरी ओर कश्मीर टाईम्स की संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने याचिकाकर्ता पर सवाल खड़े किए। एजी ने याचिकाकर्ता के दावों का विरोध करते हुए कहा कि राज्य में दूसरे अखबार छप रहे हैं इतना ही नहीं टीवी और रेडियो चैनेल भी वहाँ से प्रसारित हो रहे है। उन्होंने कहा कि मीडिया कर्मियों को इंटरनेट सुविधा के साथ साथ रिपोर्टिंग के लिए आने जाने के लिए वाहन भी उपलब्ध कराए गए है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आंशिक तौर पाबन्दियां सिर्फ लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि 1991 के बाद से जम्मू कश्मीर आतंकवाद का दंश झेलता रहा है। अटार्नी जनरल ने एक आंकडों का हवाला देते हुए कहा कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक 41866 लोग जान गवां चुके है। इतना ही नहीं 71038 हिंसा की घटनाएं हुई है, 15292 सुरक्षा बलों को जान गवानी पड़ी है, 22536 आतंकवादी मारे गए है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 5 अगस्त के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली। एक भी शख्स को जान नहीं गंवानी पड़ी।