केंद्रीय टीम ने देखी बरसात की तबाही, शिमला की कच्ची घाटी से किन्नौर के सांगला तक लिया हालात का जायजा

मानसून के नुकसान का आकलन करने पहुंची इंटर मिनिस्ट्रियल सेंटल टीम (आईएमसीटी) ने जांच पूरी कर ली है। टीम ने कांगड़ा, शिमला, किन्नौर, मंडी और कुल्लू जिले में मौके पर जाकर नुकसान का जायजा लिया है। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर यह पूरी जांच की गई है। टीम ने शिमला शहर के नजदीक कच्ची घाटी में बहुमंजिला भवन के जमींदोज होने, किन्नौर जिले के सांगला में पुल पर चट्टानें गिरने समेत कांगड़ा, मंडी और कुल्लू में सड़कों और घरों को हुए नुकसान का जायजा लिया है। इसके बाद टीम ने शुक्रवार को प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव से आंकड़े साझा किए हैं। बता दें यह टीम तीन दिवसीय दौरे पर हिमाचल आई थी। इस टीम ने कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और किन्नौर के सांगला क्षेत्र का दौरा किया। इसमें पता चला है कि लोक निर्माण विभाग को 649.94 करोड़, जलशक्ति विभाग को 112.54 करोड़ के साथ 1864 घरों को नुकसान पहुंचा है।

कृषि विभाग को 27.64 करोड़, बागबानी विभाग को 55.17 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। मानसून से 11623 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। ग्रामीण विकास विभाग को 2.74 करोड़ और शहरी विकास को 13.44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बिजली बोर्ड को 9.29 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा बरसात के दौरान विभिन्न कारणों से 476 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें सबसे ज्यादा 64 मौतें चंबा जिला में हुई हैं, जबकि भूस्खलन की सर्वाधिक 26 घटनाएं शिमला और तेज बहाव से नुकसान की सबसे ज्यादा 10 घटनाएं लाहुल-स्पीति में सामने आई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर मुआवजा राशि राज्य की ओर से मांगी गई है। अब केंद्र की आईएमसीटी ने सभी जगहों का मुआयना कर लिया है। इस दौरान जुटाए गए आंकड़ों को मुख्य सचिव के साथ साझा किया गया। अब टीम सारे आंकड़े केंद्र को सुपुर्द करेगी और केंद्र से ही फंड जारी होगा। आपदा प्रबंधन बोर्ड के निदेशक सुदेश मोख्टा ने बताया कि टीम ने जगह-जगह से आंकड़े जुटाए हैं। सरकार की ओर से नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट टीम को सौंपी गई है।