किसान आंदोलन से उद्योगों में उत्पादन ठप, करोड़ों का नुकसान

कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन से हिमाचल के उद्योग बेपटरी होने लगे हैं। यहां के अधिकांश उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया है। कच्चा माल नहीं पहुंचने, तैयार माल फैक्ट्रियों में अटकने से हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कुछ और दिन ऐसे ही हालात रहे तो कुछ यूनिटों पर ताला लगाने की नौबत आ जाएगी। उद्योगों का माल लाने और ले जाने वाले ट्रकों पर भी आंदोलन की मार पड़ रही है।

सूबे के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ (बीबीएन) से सबसे ज्यादा माल दिल्ली जाता है। लेकिन दिल्ली बंद होने से पिछले 20 दिनों से माल की सप्लाई ठप है। यहां से प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रक तैयार माल दिल्ली लेकर जाते थे। करोड़ों रुपये का माल प्रतिदिन दिल्ली रवाना होता था, लेकिन अब न तो माल ही तैयार हो रहा है और न ही कोई ट्रक दिल्ली जा रहा है। ट्रक संचालक कृष्ण कुमार कौशल ने बताया कि दिल्ली बंद होने से उनकी यूनियन को काम नहीं मिल रहा है।
दिल्ली के लिए एक ट्रक का भाड़ा 15 हजार रुपये है और प्रति दिन 15 लाख रुपये का नुकसान अकेले ट्रक यूनियन को हो रहा है। वहीं, ट्रक यूनियन के प्रधान विद्या रतन चौधरी ने कहा कि किसान आंदोलन का असर जहां उद्योगों पर पड़ा है, वहीं ट्रक यूनियन को भी इसकी मार झेलनी पड़ रही है। पिछले 20 दिनों से दिल्ली के लिए कोई माल नहीं गया है और न ही दिल्ली से कोई माल आया है। दिल्ली से आगे जाने वाले शहरों के लिए भी वैकल्पिक रास्तों से माल भेजा जा रहा है। इससे ट्रकों पर अतिरिक्त डीजल की मार पड़ रही है।  संवाद
दिल्ली सबसे बड़ी मार्केट
सीआईआई के हिमाचल प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने बताया कि बीबीएन में तैयार होने वाले उत्पाद की दिल्ली सबसे बड़ी मार्केट है। करोड़ों रुपये का तैयार माल दिल्ली जाता था। वर्तमान में दिल्ली से न तो कोई माल बाहर निकल रहा है और न ही कोई नया माल तैयार हो रहा है। इसका सीधा असर बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ा है। दिल्ली का माल जिन उद्योगों ने तैयार किया है, वह बंद के चलते न तो भेज पा रहे हैं और न ही नया ऑर्डर मिल पा रहा है। इससे उद्योगों में मंदी छाई हुई है।