शिमला: एचपीयू में चले लात-घूंसे, एसएफआई-एबीवीपी कार्यकर्ताओं में भिड़ंत

प्रदेश विश्वविद्यालय में एक बार फिर से मंगलवार को छात्र संगठनों में सरेआम लात-घूंसे चले। हैरानी इस बात की है कि एसएफआई व एबीवीपी की लड़ाई उस वक्त हुई, जब विश्वविद्यालय में पीजी के लिए एंट्रास परीक्षाएं चल रही है। आरोप है कि एबीवीपी के छात्रों ने एसएफआई की छात्रा पर अभद्र कमेंट किए। इस पर जब वह छात्रा एबीवीपी कार्यकर्ताओं को समझाती है, तो जोर-जोर से बहस होने लगती है। इस बीच दोनों संगठनों के छात्र नेता वहां आ जाते है और विवाद बढ़़ जाता है। देखते ही देखते परिसर में एक-दूसरे पर बरसने लगे।

हर बार की तरफ इस बार भी दोनों संगठनों ने अपने बचाव में एक-दूसरे पर आरोप लगाए। हालांकि सवाल यह उठता है कि एचपीयू में तैनात पुलिस बल के सामने छात्र संगठनों का यह झगड़ा हुआ। बावजूद इसके किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिमला पुलिस ने एचपीयू में एक बार फिर से क्यूआरटी के जवान तैनात कर दिए है। फिलहाल सवाल यह उठता है कि आखिर कैंपस में उन छात्रों को क्यों एंट्री दी जा रही है, जिनका एग्जाम तक नहीं है। एचपीयू में छात्र संगठनों के बीच यह झगड़ा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी एक बार झगड़ा हो चुका है। कोविड में छात्र संगठनों की आपस भीड़त से माहौल खराब होता है। एबीवीपी ने प्रेस बयान में आरोप लगाया कि एचपीयू के शैक्षिक माहौल को एसएफआई ने खराब किया है।

माहौल खराब कर रहा एसएफआई

एबीवीपी के इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा कि नौ अगस्त से विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षाएं चल रही है, ऐसे समय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अनेक कोनों से परीक्षा देने आ रहे छात्रों की भरपूर सहायता कर रहे हैं। कोरोना काल में भी विद्यार्थी परिषद पूरे देश में सेवाकार्य में कार्यरत रही। इन्हीं सेवा कार्यों के लिए एबीवीपी को एचपीयू के स्थापना दिवस पर राज्यपाल ने सम्मानित किया। ऐसे में इन सभी कार्य से बौखलाई एसएफआई माहौल खराब कर रही है।

छात्रा पर कमेंट करने पर विवाद

एसएफआई कार्यकर्ता प्रोविंद्र ने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ता काफी समय से उनके संगठन की कार्यकर्ता पर गलत कमेंट कर रहे थे। बावजूद इसके जब उनको समझाने का प्रयास किया, तो वो हाथापाई पर उतर आए।