उपचुनाव: आनंद की हिमाचल में फिर धमक से कांग्रेस खेमों में नई हलचल

केंद्रीय नेता आनंद शर्मा की हिमाचल में फिर धमक से कांग्रेस के कई खेमों में नई हलचल है। बेशक, अन्य केंद्रीय नेताओं की तरह कांग्रेस के स्टार प्रचारक आनंद शर्मा प्रचार करने आए हैं, मगर भाजपा नेताओं से ज्यादा कांग्रेसियों का ध्यान खींचे हुए हैं। उनके आते ही कांग्रेस के तमाम खेमों में अलग तरह की सुगबुगाहट है।

मूल रूप से शिमला निवासी पूर्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने मंडी संसदीय क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया है। वह गुरुवार को मनाली पहुंचे। उन्होंने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाकर हिमाचल और केंद्र सरकार पर जुबानी हमला बोला। वह मनाली के बाद लाहौल के कोकसर भी गए। शनिवार को मंडी के द्रंग और अन्य हिस्सों और सोमवार को जुब्बल-कोटखाई में प्रचार करेंगे।

पूर्व में वीरभद्र सिंह हिमाचल कांग्रेस के सर्वमान्य नेता थे। उनकी आनंद शर्मा से कई मुद्दों पर तकरार रहती थी। इसलिए वह चाहकर भी हिमाचल के मसलों पर ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। फिर चाहे चुनाव प्रचार हो या कोई अन्य मामला। इस बार वह मुक्तकंठ होकर प्रचार में जुटे हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर की नियुक्ति में आनंद की बड़ी भूमिका रही है। सुखविंद्र सुक्खू भी अगर छह साल तक प्रदेशाध्यक्ष रहे और वीरभद्र को आंखें दिखाते रहे तो इसके पीछे भी आनंद का अभयदान माना जाता था।

कयास लगाए जा रहे हैं कि हिमाचल में वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद जो खालीपन है, उसे आनंद शर्मा ही भर सकते हैं। हिमाचल कांग्रेस में आनंद ने अपना दखल सुक्खू के बाद राठौर की तैनाती से जारी रखा। वीरभद्र के नहीं रहने के बाद बहुत से नेता उपचुनाव के नतीजों से जो भी नए समीकरण बनते हैं, उसके बाद आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीएम पद की दावेदारी में खडे़ हो सकते हैं। खुद को सबका नेता घोषित करवाने की जुगत में जुट सकते हैं।

प्रदेश के बारे में एक मिथ भी बन चुका है कि यहां जनता पांच साल बाद सत्ता को लेकर अपना मन बदल देती है। इसी मिथ के आसरे कांग्रेस इस बार पहले से शक्तिशाली भाजपा को अनदेखा कर फिर सत्ता में लौटने को आतुर है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना चुनौती होगी। कांग्रेस के कई प्रादेशिक नेताओं में रस्साकशी चली तो आनंद हाईकमान के पास एक अच्छा विकल्प होंगे। इसलिए बेशक अब आनंद के सक्रिय होने का बहाना उपचुनाव हो, मगर प्रदेश कांग्रेस के कई खेमों में इससे अलग ही हलचल है।