आतंकियों के जलाए मंदिर में स्मारक बनाकर मनेगा पंडितों का शहीदी दिवस

कश्मीर के ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर में कश्मीरी पंडितों का शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। तीन दशक पूर्व कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और आतंकियों की आगजनी के बाद से जर्जर पड़े मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कश्मीर में सबसे पुरानी सभाओं में शामिल सनातन धर्म शीतलनाथ आश्रम सभा शहीदों का स्मारक बनाकर 13 व 14 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन कर कश्मीरी पंडितों का शहीदी दिवस मनाएगी।

तीन दशक बाद मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। महाशिवरात्रि समेत अन्य पर्वों पर पूजन शुरू किया गया है। अब शहीदी स्मारक और शहीदी दिवस की तैयारी शुरू हो गई है। यह मंदिर अलगाववादियों के गढ़ रहे श्रीनगर के पुराने शहर हब्बाकदल के क्राल खुड में स्थित है।

सभा के पदाधिकारी आशीष कौल ने बताया कि स्थायी पुजारी और रोजाना आरती की व्यवस्था कर ली गई है। मुख्य गर्भगृह के क्षतिग्रस्त हिस्से को जीर्णोद्धार से ठीक किया जा रहा है। अगले चरण में शहीद हुए कश्मीरी पंडितों की याद में स्मारक बनवाया जाएगा। शीतलनाथ मंदिर कमेटी के महासचिव जेएल रैणा ने कहा कि ऐतिहासिक मंदिर का पुराना स्वरूप लौटाया जा रहा है। तीन दशक बाद मंदिर परिसर में शिवरात्रि और वनरेह पर हवन किया गया है। अब शहीदी स्मारक बनाकर शहीदी दिवस मनाने की तैयारी की जा रही है।

महात्मा गांधी, वीर सावरकर भी मंदिर में आए थे
शीतलनाथ मंदिर अविभाजित कश्मीर में कई आंदोलनों का केंद्र रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी, वीर सावरकर और कई अन्य क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर को ही अपने जन-आंदोलनों का केंद्र बनाया। सभा के अनुसार मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य नए कश्मीर की नींव रखने जैसा है।