अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए वित्त मंत्री के बड़े एलान

दीवाली से पहले कॉर्पोरेट जगत को वित्त मंत्री ने आज  दीवाली का तोहफा Bonanza के रूप में दे दिया है… कंपनियों को कर में बड़ी छूट का एलान किया गया है… इसे पिछले 28 सालों का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार करार दिया जा रहा है… वित्त मंत्री ने कहा है कि कॉर्पोरेट टैक्स की नई दरें दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे कम होंगी। प्रधानमंत्री ने भी इसे ऐतिहासिक करार दिया है..

अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिये शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बड़ी घोषणाएं की। इन घोषणाओं में कंपनियों के लिये आयकर की दर करीब 10 प्रतिशत घटाकर 25.17 प्रतिशत करना तथा नयी विनिर्माण कंपनियों के लिये कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर घटाकर 17.01 प्रतिशत करना शामिल है। इन घोषणाओं से निवेश को प्रोत्साहन मिलने तथा रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है।

गोवा की राजधानी पणजी में जीएसटी की बैठक से पहले वित्त मंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेस में ये घोषणाएं की। वित्त मंत्री ने कहा कि इन बदलावों को आयकर अधिनियम के लिये एक अध्यादेश के जरिये अमल में लाया जाएगा। वित्त मंत्री के मुताबिक आर्थिक वृद्धि तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिये आयकर अधिनियम में एक नया प्रावधान किया गया है, जो वित्त वर्ष 2019-20 से प्रभावी होगा।

वित्त मंत्री की घोषणा की मुख्य बातों पर गौर करें तो –

1- किसी भी घरेलू कंपनी को 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि इसके लिये शर्त होगी कि वे किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेंगे।

2- उपकर और अधिभार समेत इन कंपनियों के लिये प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। साथ ही ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान नहीं करना होगा।

3- एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने पर 15 प्रतिशत की दर से आयकर भरने का विकल्प मिलेगा। यह लाभ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो कोई अन्य प्रोत्साहन या छूट नहीं लेंगे और 31 मार्च 2023 से पहले परिचालन शुरू करेंगे।

4- इन कंपनियों के लिये अधिशेष और उपकर समेत प्रभावी कर की दर 17.01 प्रतिशत होगी। साथ ही इन कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी।

5- वित्त कानून, 2019 के जरिये लागू ‘बढ़ी हुई दर से अधिभार’ अब प्रतिभूति लेन-देन करने वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर नहीं लगेगा।

सीएसआर का दायरा भी बढ़ाया गया है

इन घोषणाओं से सरकारी खजाने पर 1,45,000 करोड़ रुपये का असर पड़ने का अनुमान है।

हालांकि वित्त मंत्री ने नयी घोषणाओं का राजकोषीय घाटा के लक्ष्य पर असर पड़ने संबंधी सवाल पर कहा कि  सरकार वास्तविकता के प्रति सजग है और वह बाद में आंकड़ों में सामंजस्य बिठाएगी।