अमेरिका में माइंड गेमः चीनी नीति को लेकर बाइडन पर बढ़ाया ट्रंप समर्थकों ने दबाव

अमेरिका जब सत्ता हस्तांतरण के दौर में है, ट्रंप प्रशासन से जुड़े वहां के खुफिया तंत्र ने ‘माइंड गेम’ तेज कर दिया है। जानकारों के मुताबिक उसकी कोशिश यह है कि आगामी जो बाइडेन प्रशासन भी चीन के खिलाफ अमेरिका का मौजूदा रुख जारी रखे। ये दबाव बनाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सर्वोच्च खुफिया अधिकारी ने अब मीडिया का सहारा लिया है।

नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने दक्षिणपंथी रुझान वाले अखबार- वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख लिख कर ये चेतावनी दी है कि चीन अमेरिका के साथ टकराव के रास्ते पर चलने की अब खुली तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन आज अमेरिका और दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के लिए दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
रैटक्लिफ ने ये सनसनीखेज आरोप लगाया है कि चीन ने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के कई दर्जन सदस्यों और उनके सहयोगियों को प्रभावित करने की मुहिम इस साल छेड़ी है। रैटक्लिफ के पहले ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी ऐसी चेतावनियां पहले दे चुके हैं। उनमें से कुछ ने चीन के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की वकालत भी की है। विश्लेषक इन सबको आगामी बाइडन प्रशासन की नीति को प्रभावित करने के प्रयासों का हिस्सा मानते हैं।

रैटक्लिफ के लेख में एक खास किस्म की आपात स्थिति का संकेत देने की कोशिश की गई है। इसमें एक सनसनीखेज दावा यह भी किया गया है कि चीन ने अपने सैनिकों की शारीरिक क्षमताओं को कृत्रिम ढंग से बढ़ाने के लिए कुछ खास तरह के प्रयोग किए हैं। उन्होंने कहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन को दुनिया की सर्व-प्रमुख सैनिक शक्ति बनाने की “आक्रामक योजना” तैयार की है। ऐसा अमेरिकी की सैन्य टेक्नोलॉजी को चुरा कर किया जा रहा है।

रैटक्लिफ ने कहा है कि चीन की नजर में ऐसी विश्व व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से एक भटकाव है, जिसमें चीन दुनिया का सिरमौर ना हो। अमेरिकी खुफिया अधिकारी का आरोप है कि चीन का मकसद दुनिया भर में स्वतंत्रताओं को खत्म कर देना है।

अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक जो बाइडन की विदेश नीति टीम चीन की चुनौतियों से वाकिफ है, लेकिन उसका मानना है कि ट्रंप के रुख से चीन को फायदा हुआ है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका ने सारे कदम अपने सहयोगी देशों से बिना राय-मशविरा किए उठा लिए। डेमोक्रेटिक पार्टी के बड़े नेताओं ने बाइडन टीम से अपनी की है कि वह चीन के खिलाफ सख्त, लेकिन ट्रंप के रुख से अलग नजरिया अपनाए।

बाइडेन ने रैटक्लिफ की जगह पर एवरिल हेन्स को नेशनल इंटेलिजेंस का अगला निदेशक नियुक्त किया है। उनसे मुलाकात के बाद सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर ने कहा- मैंने बाइडन टीम से अपील की है कि वह चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाए। लेकिन यह रुख अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण और बहुपक्षीय होना चाहिए, ताकि अमेरिका पीछे ना छूट जाए। जरूरत इस बात की है कि अमेरिका सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्वच्छ ऊर्जा आदि जैसी तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करे।

बाइडन ने कहा है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अमेरिका का हित चीन के साथ मिलकर काम करने में है। जलवायु परिवर्तन और उत्तर कोरिया से जुड़े मसले ऐसे ही क्षेत्र हैं। बाइडन के सलाहकारों ने कहा है कि निर्वाचित राष्ट्रपति 5जी, बौद्धिक संपदा चोरी, हांगकांग में लोकतंत्र के दमन और एशियाई जल क्षेत्र में चीन के विस्तार जैसे मुद्दों पर अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर रुख तय करेंगे।

अभी ये कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन के प्रति बाइडन प्रशासन की वास्तविक नीति क्या होगी। इस बीच ये साफ है कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने अगले राष्ट्रपति पर राष्ट्रपति ट्रंप की चीन नीति से ज्यादा ना भटकने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। अब पर्यवेक्षकों की निगाह ये देखने पर होगी कि बाइडन की विदेश नीति टीम से सचमुच कितनी प्रभावित होती है।