हम अनुच्छेद 370 और अपना विशेष दर्जा वापस लेकर ही रहेंगे: महबूबा मुफ्ती

जम्मू -कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने करीब 14 महीनों की रिहाई के ठीक 11 दिन बाद श्रीनगर में शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि मैं तब तक कोई भी झंडा हाथ में नहीं उठाएंगी जब तक जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और उनका संविधान वापस नहीं लौटाया जाएगा। लोगों को नाउम्मीद नहीं होना चाहिए, हम अनुच्छेद 370 और अपना विशेष दर्जा वापस लेकर ही रहेंगे।
अपने संविधान के बिना कोई शपथ लेने के लिए तैयार नहीं
पीडीपी अध्यक्ष ने अपने आवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले चुनावों में पार्टी भाग लेगी अथवा नहीं यह अब नवगठित गठबंधन तय करेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह स्टेटहुड और जम्मू-कश्मीर के झंडे की वापसी तक चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं हैं। मैं अपने ध्वज और अपने संविधान के बिना कोई शपथ लेने के लिए तैयार नहीं हूं । उन्होंने कहा कि मैं सत्ता लिए बहुत लालायित नहीं हूं। अगर मुझे सत्ता का कोई लालच होता तो हम कांग्रेस छोड़कर पीडीपी नहीं बनाते। हम केवल सत्ता के लिए नहीं हैं। हम 2014 के चुनावों के बाद कांग्रेस के साथ सरकार बना सकते थे परंतु हमने भाजपा के साथ एक कारण के लिए गठबंधन किया ताकि जम्मू-कश्मीर का विकास हो सके।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी और पीपुल्स एलायंस डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल्स (डीडीसी) चुनाव लड़ेगी? तो उन्होंने कहा कि गठबंधन की बैठक शनिवार को हो रही है वहां जहां इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। जब आगे पूछा गया कि क्या चुनाव नहीं लड़ना भारतीय जनता पार्टी के लिए खाली मैदान छोड़ना नहीं होगा तो उन्होंने इसे काल्पनिक सवाल करार दिया। कहा, हम सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेंगे। फारूक अब्दुल्ला हमारे नेता हैं, इसलिए बैठक में सबकी राय जानने के बाद ही फैसला होगा।
 इससे पहले उन्होंने कहा कि जिस दौरान मैं बंद थी तो मुझे लगता था कि इन लोगों (केंद्र सरकार) ने पीडीपी को खत्म कर दिया है लेकिन बाहर आने पर जिस तरह से मैंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बात की उससे यह साफ  लगता है कि पीडीपी का हर कार्यकर्ता मुफ्ती साहब के एजेंडे के साथ खड़ा हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के लोग सदमे में हैं, नाउम्मीद हो चुके हैं। यही कारण है कि मैं मीडिया के माध्यम से लोगों को पैगाम देना चाहती हूं कि कितना भी बड़ा और खूंखार चोर-डाकू हो जो चीज़ वो डाका डालकर ले जाता है उसे वो चीज़ उसे लौटानी ही पड़ती है। इसलिए 5 अगस्त 2019 को जिस प्रकार डाकाजनी कर अनुच्छेद 370 को हटाया गया, वो किसी कानून के तहत नहीं लिया गया। कहा कि दिल्ली के लोग जिस संविधान की कसम खाते हैं उसी की उन्होंने धज्जियां उड़ा दीं।
एक तरफ चीन दूसरी तरफ पाकिस्तान
महबूबा ने यह भी कहा कि कश्मीर मसले का भी हल निकालने की ज़रूरत है। कश्मीर एक मसला है और हमारी पार्टी जो का यही मकसद है कि जम्मू कश्मीर को इस दलदल से निकालकर इसे एक अमन का वातावरण बनाना है। आज एक तरफ  चीन हमारे बार्डर पर बैठा है और दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ गतिरोध जारी है। इसका हल मुफ़्ती साहब के एजेंडे के तहत बातचीत से ही निकालने की ज़रूरत है।
अब हम जैसे नेताओं के खून देने की बारी
आज तक यहां के लोगों का खून बहा और अब हम जैसे लीडरों की खून देने की बारी है। हम हिंसा नहीं चाहते हैं वो लोग हिंसा चाहते हैं। 370 के हाटने के बाद भी यहां ऐसे कानून लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई जिससे जम्मू कश्मीर में लोग हिंसा पर उतार आएं।  चाहे  वो उर्दू भाषा की बात हो, डोमिसाइल कानून की बात हो या फिर कोई और कानून हो।
आज के भारत के साथ हम सहज नहीं  
महबूबा ने कहा कि 5 अगस्त को दिल्ली ने वो रिश्ता तोड़ दिया जिसकी वजह से हमने इनके साथ गठजोड़ किया था। हमने उदारवादी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत के साथ हाथ मिलाया था लेकिन आज के भारत के साथ हम सहज नहीं है। आज के भारत में अल्पसंख्यक, दलित,आदि सुरक्षित नहीं हैं। महबूबा ने कहा कि कहा कि यह एक सियासी जंग है जो कि डॉ, फारूक, उमर या सज्जाद लोन अकेले नहीं लड़ सकते एक साथ होकर भी नहीं लड़ सकते हमें लोगों का साथ चाहिए।