अनोखा रिकॉर्ड: अंतरराष्ट्रीय धावक सुनील ने 36 घंटों में पार किया “रोट्री ट्रैक”

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त धावक सुनील शर्मा ने अनोखा रेकॉर्ड दर्ज कर प्रदेश व देश का नाम रोशन किया। धावक सुनील ने अपनी एक टीम के साथ उत्तराखंड में स्तिथ देश के सबसे खूबसूरत ट्रैकों में सुमार “रोट्री ट्रैक” को करीब 36 घंटों के दौरान आने जाने का अनोखा रिकॉर्ड कायम करने में देवाल ब्लाक के युवकों एवं युवतियों ने कायम करने में सफलता हासिल कर ली हैं। आम तौर पर इस ट्रैक पर जाने-आने में 5 से 7 दिनों तक लग जाते हैं।समुद्रतल से करीब 18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित रोट्री नामक स्थान नंदा घुंघटी हिमपर्वत शिखर की तलहटी पर स्थित है।
यह स्थान 12 वर्षों में आयोजित होने वाली श्री नंदा देवी राजजात यात्रा के पूजा स्थल होमकुंड़ से करीब 4 किमी ऊपर स्थित है। यूं तो जहां तक पहुंचने के लिए दो रस्ते में एक रस्ता घाट विकास खंड के सुतोल, कनोल, लाटाखोपड़ी,  चंदनियाघट, मंदाकिनी नदी को पार कर होमकुंड होते हुए रोट्री पास तक पहुंचा जा सकता हैं। दूसरा ट्रैक देवाल ब्लाक के वांण गांव से शुरू होता हैं। अधिकांशतः सहासिक पदयात्री इसी मार्ग से यात्रा करते हैं।

यात्रा में दो लोगों का सबसे ज्यादा योगदान
धावक सुनील ने इस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया की ये यात्रा काफी मुश्किल थी पर फिर भी हमने इसे पूरा किया। सुनील ने बताया की इस यात्रा में जाना और पूरा करने में दो लोगो का सबसे ज्यादा योगदान है। वह है रवि और विक्रम, रवि पेशे से इंजीनियर है और विक्रम एसबीआई नाहन में डिप्टी मैनेजर तोर पर कार्यरत है। धावक सुनील ने बताया की इन दोनों की बदौलत ये यात्रा संभव हो पाई।
बिना रूके,रात्रि विश्राम किए एवं अधिक संसाधनों के बगैर यात्रा
इस ट्रैक की खुबसूरती की जानकारी मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त धावक सुनील शर्मा ने वांण गांव के नवयुवकों एवं युवतियों से वांण से रोट्री तक कम से कम समय में बिना रूके,रात्रि विश्राम किए एवं अधिक संसाधनों के बगैर ही वांण से रोट्री तक जाने एवं आने के बारे में बात की तो वांण गांव के मूल निवासी एवं चमोली जिला पंचायत सदस्य 27 वर्षीय कृष्णा बिष्ट सहित उत्तसाही युवा 32 वर्षीय कलम सिंह,24 उदय सिंह, 28 विनोद सिंह, 32 कुंवर सिंह, तारा चंद, वीरेंदरा के साथ ही सबसे कम उम्र की 19 वर्षीय भाग्यरथी इस सहासिक एवं अनोखी यात्रा के लिए तैयार हो गए।

यात्रा में लग जाते है 5 से 7 दिन
बताया जा रहा हैं कि रोट्री तक की यात्रा में जाने-आने में कम-से-कम 5 से 7 दिन लग जाते हैं। इस दौरान पदयात्रियों को सर्वाधिक कष्टकारी 16500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ज्यूंरागली को 2 बार पार करना पड़ता हैं। इस दौरान वांण से गैरोली पातल, वेदनी बुग्याल,पातरनचौनिया,कैलुवाविनायक,बगुवावासा, रूपकुंड, ज्यूंरागली,शिलासमुद्र,होमकुंड जैसे दुनिया के अद्भुत स्थानों में सुमार स्थानों से गुजरते हुए रोट्री तक जाया जा सकता हैं।

27 सितंबर को शुरू की थी यात्रा
जिपंस कृष्णा बिष्ट ने बताया कि यात्रा की तैयारी के बाद वांण से पिछले महीने सितंबर की 27 तारीख की रात 1 बजे यह दल रोट्री की यात्रा पर निकल पड़ा और बिना किसी स्थान पर रात्रि विश्राम किए और अधिक देर किसी स्थान पर रूके ही रोट्री तक गया और वहां पर कुछ देर रूकने के बाद दल वापस वांण गांव के लिए लौट पड़ा।उनका दावा है कि वांण से रोट्री तक करीब 54 किमी जाने एवं वहां से 54 किमी वापस वांण आने में इस दल को पूरे 36 घंटे लगे हैं।जोकि अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड हैं।इस दौरान उन्हें कई ऊंची-नीची पहाड़ियों, बुग्यालों, नालों,संकरे रास्तों से हैड लाईटों,टार्चों के सहारे जाना आना पड़ा बताया कि यह दल 29 सितंबर की दोपहर को 1 बजे वांण गांव पहुंचा था। वास्तव में दुर्गम पहाड़ी बुग्यालों में 36 घंटों में करीब 108 किमी की पैदल यात्रा करना अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड हैं।
पहाड़ों का खूबसूरत नजारा
सुनील ने इस यात्रा में रास्ते का जिक्र करते हुए बताया की ये ट्रैक काफी मुश्किल है पर यहाँ का शुद्ध वातावरण और खूबसूरत नजारा काफी अच्छा है। उनोहने बताया की इस ट्रेक में पहाड़ों का नजारा इतना सूंदर है की आपकी आंखे उन पहाड़ों को निहारती रहती है ।