शिमला और धर्मशाला को जोड़ने वाला महत्त्वूपर्ण शिमला-मटौर फोरलेन का निर्माण अब नहीं होगा

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प्रदेश की दो राजधानियों शिमला और धर्मशाला को जोड़ने वाला महत्त्वूपर्ण शिमला-मटौर फोरलेन का निर्माण अब नहीं होगा। केंद्र ने फंडिंग की कमी का हवाला देते हुए प्रोजेक्ट हिमाचल सरकार को वापस कर दिया है। ऐसे में पिछले चार-पांच साल से इस फोरेलेन के निर्माण के लिए की गई सारी प्रक्रिया खत्म हो गई है।

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के एनएचएआई के महाप्रबंधक की ओर से इस बारे में सूचना सरकार को भेजी गई है। एनएचएआई की ओर से आए इन आदेशों के बाद जहां प्रदेश के सैकड़ों उन परिवारों की उम्मीदों पर पानी फिरा है, जिन्हें यह आस थी कि उन्हें उनकी जमीन का अच्छा मुआवजा मिलेगा, वहीं अब तक इस फोरलेन के सर्वे से लेकर पिछले कुछ वर्षों में जारी की गई अधिसूचनाओं पर जो करोड़ों रुपए खर्च हुआ है, वह भी इस बड़े प्रोजेक्ट के बंद होने के साथ ही मिट्टी में मिल गया। एनएचएआई की ओर से जारी किए गई इस सूचना के बाद अब शिमला से मटौर तक एनएच-88 जिसकी देखरेख अब तक एनएचएआई कर रही थी, अब स्टेट पीडब्ल्यूडी को वापस हो गया है।

बता दें कि शिमला से मटौर तक प्रस्तावित फोरलेन की निर्माण प्रक्रिया में करीब डेढ़ साल से डिले होना शुरू हो गया था। पहले प्रदेश सरकार ने यह कहकर काम में ऑब्जेक्शन लगा दिया था कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां फोरेलेन निर्माण के अनुकूल नहीं हैं। साथ ही कहा गया था कि यदि पहाड़ों से ज्यादा छेड़छाड़ हुई तो प्रदेश को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बाद में इस मसले को भी सुलझा लिया गया, लेकिन पिछले कुछ समय से यह तर्क दिया जाने लगा कि एनएच-88 पर टूरिस्ट न के बराबर है। साथ ही यहां वाहनों का लोड भी ज्यादा नहीं है, इसलिए फोरलेन की जरूरत नहीं है।

हैरानी की बात है कि जिस प्रोजेक्ट की रूपरेखा 2015-16 में बननी शुरू हो गई थी, उसमें करीब चार साल बाद दिए जाने वाले यह तर्क कितने सार्थक हैं। अब यह कहकर प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया कि इसे बनाने के लिए सरकार के पास फंड नहीं है। वे लोग तो अब मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में उनके लिए तो यह खबर काफी झटका देने वाली है।

बता दें कि शिमला से मटौर तक पांच पैच में होने वाले फोरलेन निर्माण के बाद 224 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की दूरी 180 किलोमीटर रह जानी थी। यह मार्ग इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसके एक सिरे पर प्रदेश की राजधानी और टूरिस्ट प्लेस शिमला है, तो दूसरे पर प्रदेश की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला और मकलोडगंज जैसा महत्त्वपूर्ण टूरिस्ट प्लेस। इसलिए इस फोरलेन का निर्माण बेहद जरूरी था।

गौरतलब है कि प्रस्तावित इस फोरलेन के पांचवें पैच यानी ज्वालामुखी से मटौर तक की कुछ भाग को छोड़कर थ्रीडी नोटिफिकेशन हो चुकी है। यानी, जिन भूमि मालिकों की जमीन फोरलेन के लिए एक्वायर की जानी है, उसके लैंड टाइटल चेंज हो चुके हैं। वे लोग तो अब मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में उनके लिए तो यह खबर काफी झटका देने वाली है। हालांकि कई लोग तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने अच्छा खासा घर होते हुए भी नए घर का निर्माण कर लिया था।