फर्स्ट व सेकेंड ईयर की परीक्षाओं को करवाया जाए या नहीं, सस्पेंस ?

कालेज में पढ़ने वाले फर्स्ट व सेकेंड ईयर के छात्रों को प्रोमोट करे या फाइनल परीक्षा करवाएं, इस पर सरकार व विभाग कोई फैसला नहीं ले पाए हैं। उधर, परीक्षाओं को लेकर एचपीयू ने तैयारी पूरी कर ली है। विभागीय जानकारी के अनुसार कालेजों में फर्स्ट व सेकेंड ईयर के छात्रों के प्रश्नपत्र तक पहुंच गए हैं, लेकिन शिक्षा विभाग व कालेज प्रबंधन भी असमंजस की स्थिति में है कि आखिर फाइनल परीक्षाएं इन छात्रों की होनी है या नहीं। हालांकि इस बीच शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार को एक बार फिर से प्रोपोजल सरकार को भेजा है, उस प्रोपोजल में शिक्षा विभाग ने सरकार से अनुमति मांगी है कि फर्स्ट व सेकेंड ईयर की परीक्षाओं को करवाया जाए या नहीं। सूत्रों की मानें, तो कालेज छात्रों की परीक्षा करवाने के हक में सरकार नहीं है।
यूजीसी केंद्र सरकार की गाइडलाइन का कर रही इंतजार
फिलहाल कालेज परीक्षाओं को लेकर जब तक सरकार व शिक्षा विभाग की ओर से अंतिम फैसला नहीं हो पाता है, तब तक कुछ नहीं कहा सकता। बता दें कि अब सरकार भी 30 सिंतबर तक यूजीसी केंद्र सरकार की गाइडलाइन का इंतजार कर रही है। हालांकि इस बीच मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने पक्ष रखा है कि पीजी फाइनल व दूसरी कक्षाओं के छात्रों की भी सफल परीक्षाएं अभी तक हो चुकी हैं। अगर यूजी फर्स्ट व सेकेंड के एग्जाम भी करवा दिए जाते हैं, तो किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी। 60 हजार छात्रों को सरकार के फैसले का इंतजार है। छात्रों ने दूसरी कक्षा का सिलेबस आधे से ज्यादा पढ़ा दिया है।
ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह दूसरी कक्षा का सिलेबस पढ़ें या फिर पुराने ही सिलेबस को बार-बार पढ़ते रहें। बताया जा रहा है कि कालेजों में 40 हजार छात्रों के फाइनल एग्जाम भी सफल रूप से पूरे हुए हैं, वहीं अब अगर फर्स्ट व सेकेंड ईयर के एग्जाम करवा दिए जाएं, तो कोई भी समस्या नहीं आएगी। ऐसे अब अहम यह है कि सरकार 60 हजार से ज्यादा फर्स्ट व सेकेंड ईयर छात्रों के भविष्य को लेकर कोई फैसला ले पाती है या नहीं। हालांकि शिक्षा विभाग छात्रों की परीक्षाएं करवाने के पक्ष में अब दिखाई नहीं दे रहा है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यूजी के अंतिम वर्ष की परीक्षा कालेजों में सही से हो रही हैं, तो पहले और दूसरे वर्ष की परीक्षाएं भी करवाई जा सकती हैं।
कालेजों में अप्वाइंटमेंट लेकर आ सकते हैं छात्र
कालेजों में इन छात्र शिक्षकों को फोन करने के बाद आ सकते हैं। अगर विषय से संबधित कोई असमंजस है, तो शिक्षकों से पूछने के लिए छात्र आ सकते हैं। इसके साथ ही 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ कालेज प्रोफेसरों को भी आने के निर्देश दिए हैं।