रफाल लडाकू विमान भारतीय वायुसेना की सेवा में शामिल

रफाल लड़ाकू विमान को आज अंबाला के वायुसेना केन्‍द्र में आयोजित एक समारोह में विधिवत भारतीय वायुसेना की सेवा में शामिल कर लिया गया है। इसके लिए विशेष रूप से आयोजित समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली भी उपस्थित थी।इस अवसर पर रक्षामंत्री ने कहा कि इन विमानों को भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाना एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि रफाल विमानों की खरीद के फैसले ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा ही बदल दी। इसका वायु सेना में शामिल किया जाना विश्‍व के लिए, खासतौर पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वालों के लिए एक बड़ा संदेश है। सिंह ने देश की सम्‍प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर कोई भी समझौता न करने का संकल्‍प दोहराया। उन्‍होंने यह भी कहा कि सेनाओं को सुदृढ़ करने का उद्देश्‍य अंतरराष्‍ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना है। रक्षामंत्री ने कहा कि भारत ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहता जिससे अंतरराष्‍ट्रीय शांति खतरे में पड़े।

रक्षा मंत्री ने कहा – सेनाओं को मजबूत करने का उद्देश्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय शांति और स्थिरता प्राप्‍त करना
सिंह ने कहा कि रफाल को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाना भारत और फ्रांस के बीच घनिष्‍ठ सामरिक सम्‍बंधों को भी दर्शाता है। दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग के जरिए रक्षा साझेदारी बढ़ायी है। टेक्‍नोलॉजी हस्‍तांतरण के समझौते के तहत मजगांव गोदी में छह स्‍कॉर्पेना पंडुब्‍बियां बनाई जा रही हैं। इस साझेदारी के तहत बनी पहली पंडुब्बी आईएनएस- कावेरी का 2017 में जलावतरण किया जा चुका है।रक्षामंत्री ने देश में रक्षा उत्‍पादन के क्षेत्र में फ्रांस के निवेश पर भी जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के आत्‍मनिर्भर भारत के अभियान के तहत कई नीतिगत सुधार किए गए हैं और सामरिक साझेदारी मॉडल के अंतर्गत रक्षा उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि स्‍वत: स्‍वीकृति के जरिए प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश 74 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा गलियारे स्‍थापित किए जा रहे हैं।

रक्षामंत्री ने वास्‍तविक नियंत्रण रेखा-एलएसी के पास हाल में त्‍वरित और निर्णायक कार्रवाई के लिए भारतीय वायुसेना को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि अग्रिम चौकियों तक साजो-सामान शीघ्रता से पहुंचाने की वायुसेना की क्षमता से यह विश्‍वास बढ़ा है कि वायुसेना अपने संचालनात्‍मक दायित्‍वों को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।