भारत और चीन के बीच सामान्‍य स्थिति बहाल करने के लिए आपसी समझौतों का पूरी तरह सम्‍मान किया जाना चाहिए: डॉ.एस जयशंकर

कोविड महामारी के दौरान जिस तरह के परिवर्तन हो रहे हैं, उसे देखते हुए यह निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि इस महामारी के बाद भारत का दुनिया को देखने का नज़रिया बदल जाएगा। इस महामारी का प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर नहीं बल्कि अलग-अलग देशों के बीच संबंधों व क्रियाकलापों पर भी पड़ रहा है। इस परिवर्तन के बीच भारत एक जटिल वातावरण में प्रवेश कर चुका है। अब यहां से वैश्विक स्तर पर भारत बड़े परिवर्तनों में अपना अहम योगदान देने की ओर बढ़ रहा है।
यह बात विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सरदार मेमोरियल व्याख्‍यान में कही। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर आकाशवाणी द्वारा आयोजित व्याख्‍यान में विदेश मंत्री ने कहा कि निकटतम भविष्‍य में भारत अफ्रीका और कैरीबियाई देशों से लेकर दक्षिण प्रशांत तक के देशों के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ करेगा। उन्‍होंने कहा कि आने वाले समय में भारतीय कूटनीति अपनी प्रतिरक्षा और सुरक्षा जरूरतों तथा आर्थिक और वाणिज्यिक हितों के अनुरूप होगी।
उन्‍होंने कहा कि भारत अपने निकटतम पड़ोसियों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा। व्‍यापार, संपर्क और आवाजाही की सुविधा बढ़ाकर और आतंकवाद को समाप्‍त करके ही क्षेत्रीय संबंधों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीमा पर शां‍ति के कारण ही तीन दशकों तक भारत और चीन के बीच सहयोग में वृद्धि हुई। दोनों देशों के संबंधों को फिर से सामान्‍य बनाने के लिए आपसी समझौतों का सम्‍मान करना होगा और वास्‍तविक नियंत्रण रेखा को एकतरफा तौर पर बदलने की कोशिश स्‍वीकार नहीं की जाएगी।
डॉ. जयशंकर के व्याख्‍यान के प्रमुख अंश :
  • भारत ने कोविड महामारी का बहुत अच्‍छी तरह मुकाबला किया है, क्योंकि अब हम पहले से अधिक विकसित हैं और सभी देशों से अच्‍छी तरह कनेक्टेड हैं। हम जीवन की गुणवत्ता में आने वाली समस्याओं को लेकर बहुत गंभीर हैं।
  • हमने देखा है कि व्‍यक्तिगत स्तर पर, परिवार, सामाजिक, शहर या राष्‍ट्रीय स्तर पर बहुत बड़े बदलाव आये हैं। हर चुनौती के बीच अवसर भी होते हैं। हम उन अवसरों को तलाशने और साकार करने की दिशा में बहुत आगे बढ़ चुके हैं। सच पूछिए तो आधुनिक भारत में हो रहे परिवर्तन सरदार पटेल की सोच को परिलक्षित कर रहे हैं।
  • 75 वर्ष पूर्व पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत भी एक कठिन दौर से गुजरा था। भारत को मिली स्वतंत्रता का मूलमंत्र जनभागीदारी था और उस दौरान जनभागीदारी को सुनिश्चित करने का बड़ा कार्य सरदार पटेल ने किया था। आज भी राष्‍ट्र निर्माण और त्वरित परिवर्तन में सरदार पटेल की सोच प्रेरणा का काम करती है।
  • सरदार पटेल ने अपने निजि स्वार्थ को किनारे रख कर राष्‍ट्र के सामने चुनौतियों से निपटने के लिए कदम बढ़ाये थे। सरदार पटेल बेहतर गवर्नेन्‍स, संगठन को मजबूत करने के कार्य, बेहतर राजनीतिक विजन, मुश्किल वक्त में धैर्य से काम करने के लिए जाने जाते थे। आज उनका व्यक्तित्व हमें ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
  • सरदार पटेल के बारे में हम जितना जानते हैं, उससे कहीं ज्यादा योगदान उन्होंने राष्‍ट्रसेवा में दिया था। जम्मू-कश्‍मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के परिग्रहण में उनकी भूमिका बहुत बड़ा उदाहरण हैं। स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक सेवा को पुन:परिभाषित करने में भी उनका बहुत बड़ा योगदान है।
  • जन समूह में ऊर्जा भरने की अजब क्षमता सरदार पटेल में थी। वे कहते थे कि राष्‍ट्र का त्वरित निर्माण चाहिए तो उद्यमिता को बढ़ावा दें। बात जब राष्‍ट्र की सुरक्षा की आती तो वे अत्यंत कठोर हो जाते। ऐसे में राजनीतिक गलियारे की कोई भी शक्ति उन्हें नहीं हिला सकती थी।
  • सरदार पटेल ने जिन मूलभूत सिद्धांतों को परिभाषित किया वो आज भी प्रासंगिक हैं। हमारे लिए प्ररेणा का असीम स्रोत हैं, खास तौर से तब जब पूरी दुनिया एक जटिल महामारी से जूझ रही है।
  •  कोरोना महामारी के बीच पूरी दुनिया को एक गहरे तनाव ने जकड़ लिया है। दुनिया के कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने लगा है। ऐसे में दुनिया की अर्थव्‍यवस्था को संतुलित करना सभी देशों के लिए बड़ी चुनौती है।