अर्मेनिया-अजरबैजान की जंग में 80 से ज्यादा लोगों की मौत , रूस-तुर्की के बीच बढ़ा तनाव

काकेकस क्षेत्र स्थित अर्मेनिया और अजरबैजान में विवादित नागोरनो व काराबाख इलाकों को लेकर शुरू हुआ भीषण युद्ध जारी है और इस जंग में अब तक 80 से ज्यादा लोगों के मारे जाने के समाचार हैं। तीन दिन से जारी इस युद्ध में सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबरें हैं। जबकि दोनों ही देश एक-दूसरे पर टैंकों, तोपों और हेलीकॉप्टर से घातक हमले करने का आरोप लगा रहे हैं।

दूसरी तरफ, जैसे-जैसे यह जंग तेज होती जा रही है, वैसे-वैसे रूस और नाटो देश के तुर्की के इसमें कूदने का खतरा मंडराने लगा है। अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि अर्मेनियाई बलों ने टारटार शहर पर गोलाबारी शुरू कर दी है। वहीं, अर्मेनियाई अधिकारियों ने कहा कि लड़ाई रातभर जारी रही और अजरबैजान ने सुबह के समय घातक हमले शुरू कर दिए। दोनों ने एक दूसरे के कई सैनिकों को मारने का दावा किया है।
अर्मेनिया ने अजरबैजान के चार हेलीकॉप्टरों को मार गिराने का दावा भी किया। संकट को देखते हुए अजरबैजान में कई जगह मार्शल लॉ लगाया गया है तथा कुछ प्रमुख शहरों में कर्फ्यू के आदेश भी दिए गए हैं। इस बीच रूस ने जहां अर्मेनिया का समर्थन किया है और नाटो देश तुर्की व इस्राइल ने अजरबैजान का साथ देने का संकल्प लिया है। इससे यह जंग अब विस्तार पकड़ सकती है।
रूस ने तुर्की को दी चेतावनी

रूस और तुर्की के बीच जहां लीबिया और सीरिया के गृहयुद्ध में तलवारें खिंची हुई हैं वहीं इस जंग से दोनों के बीच रिश्ते और खराब होने की आशंका है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों में व्यापारिक रिश्ते कायम हैं। जबकि तुर्की में बने हमलावर ड्रोन विमान नागोरनो-काराबाख में आर्मीनियाई टैंकों का शिकार कर रहे हैं। रूस ने इसे लेकर सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है।

सुरक्षा परिषद पहुंचे यूरोपीय देश

अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी संघर्ष पर चर्चा के लिए जर्मनी और कई अन्य यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के लिए बैठक बुलाने का आधिकारिक आग्रह भेजा है। एक राजनयिक सूत्र ने मंगलवार को बताया कि अनुरोध भेज दिया गया है लेकिन अभी बैठक की कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई है।