कुल्लू: पालकी में बिठाकर बीमार महिला को 6 किलोमीटर कंधों पर उठाकर पहुचाया अस्पताल

कुल्लू: कुल्लू जिले के तीर्थन घाटी की ग्राम पंचायत शिल्ली. गरुली गांव की लीला देवी पत्नी डुर सिंह को बीती रात पेट दर्द की शिकायत थी. पूरी रात वह दर्द से कराहती रही. सुबह उसे लकड़ी और कुर्सी की पालकी पर उठा कर गरुली गांव से करीब छह किलोमीटर दूर मुख्य सड़क मार्ग तुंग तक लाया गया. उसके बाद इसे निजी वाहन में इलाज के लिए बंजार अस्पताल ले जाया गया. दरअसल, ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है और नाही सड़क सुविधा है.

गांव में सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई
आजादी के 72 वर्षों बाद भी आजतक गरुली गांव में सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई है. इस कारण स्कूली छात्रों, बीमार और बुजुर्ग व्यक्तियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. बीते कुछ महीने पहले राजस्थान के बीकानेर में शहीद हुए पंचायत के गरूली गांव के लगन चंद पार्थिव शरीर की सड़क सुविधा ना होने के कारण गांव से 5 किलोमीटर पीछे अत्येष्टि करनी पड़ी थी.

फायर बिग्रेड की गाड़ी नहीं पहुंची
साल 2019 में भी जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना में तैनात डाबे राम के मकान में आग लगी थी तो सड़क सुविधा ना होने के कारण गांव में फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं आ सकी. देखते ही देखते पूरा मकान जलकर राख हो गया, जिसमें लगभग 15 लाख का नुकसान हुआ था.

स्वास्थ्य उपकेंद्र की पंचायत के लोग लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं
स्थानीय निवासियों कैप्टन लालचंद पूर्व पंचायत समिति सदस्य, पूर्व प्रधान मान दास ,गौतम नेगी, रणजीत सिंह, गोविंद सिंह, गोकुल चंद, डोलाराम ,वार्ड पंच भादर सिंह लोत राम, दिलीप सिंह, शेष राम ,मुरली चंद, मेहर चंद, बृजलाल, किशोर चंद, जीतराम, दशमी राम, वेदराम, ज्ञानचंद, सोनू, शोभाराम प्यारे राम का कहना है कि स्वास्थ्य उपकेंद्र की पंचायत के लोग लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं. वर्ष 2017 में इसकी प्रदेश सरकार ने अधिसूचना भी कर दी थी, लेकिन उसके फंक्शनल आर्डर जारी नहीं किए और पदों की व्यवस्था नहीं की थी. वर्तमान विधायक, सरकार से लगातार फंक्शनल ऑर्डर करने तथा पदों की व्यवस्था करने के लिए पत्राचार कर रहे हैं.