जम्मू-कश्मीर : प्रदेश में बना पहला फैमिली कोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने मंगलवार को श्रीनगर में प्रदेश के पहले परिवार न्यायालय (फैमिली कोर्ट) का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पारिवारिक मामलों में संवेदनशील सिस्टम विकसित करने के साथ न्यूनतम औपचारिकताओं के साथ त्वरित और सस्ता में त्वरित न्याय दिलाना है।

इसकी स्थापना श्रीनगर के जिला अदालत कांप्लेक्स में की गई है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की घोषणा के बाद प्रदेश में परिवार न्यायालय की स्थापना के सिलसिले में यह लंबी यात्रा थी। मुझे विश्वास है कि हम इस क्षेत्र में पारिवारिक न्यायालय को सफल बनाने में सक्षम होंगे।

मुख्य न्यायाधीश मित्तल ने कहा कि यह न केवल त्वरित और सस्ता न्याय सुनिनिश्चत करने के लिए है बल्कि इस मामले में शामिल सभी पक्षओं की गोपनीयता भी बरकरार रहेगी। उन्होंने फैमिली कोर्ट कमेटी के चेयरमैन जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति ताशी राबस्टन को त्वरित गति से पारिवारिक न्यायालय की स्थापना के लिए धन्यावाद दिया। साथ ही यह सुझाव भी दिया कि ऐसे पारिवारिक मामलों के लिए न्यायालय के गठन के साथ, यह विवाह जैसी संस्था की रक्षा के लिए अधिकारियों को नियुक्त करने और सुलह और परामर्श के माध्यम से विवाद के निपटान को बढ़ावा देने के लिए भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अब तक 1100 मामलों को मान्यता दी गई है और उन्हें श्रीनगर परिवार अदालत में स्थानांतरित किया गया है और ऐसे आंकड़े बढ़ सकते हैं क्योंकि मामलों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा कि संसाधन और मानव शक्ति उपलब्ध होते ही हर जिले में पारिवारिक न्यायालयों की स्थापना की जा सके ।