राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीमा के आइक्यूएसी, यूबीए, यूजीसी और वूमेन सेल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार’ का आयोजन

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीमा के आइक्यूएसी, यूबीए, यूजीसी और वूमेन सेल द्वारा 18 अक्टूबर, 2020 को सांय 6:00 बजे ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ पर ‘अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार’ का आयोजन किया गया । जिसमें देश एवं विदेश के प्रख्यात शिक्षाविदों ने भाग लिया। जिसमें डॉ अमरजीत शर्मा (निदेशक उच्च शिक्षा, हिमाचल प्रदेश), डॉ प्रमोद चौहान (एडिशनल डायरेक्टर, हिमाचल प्रदेश), डॉ0 अप्रेरणा वोलुरु (फाउंडर और सीईओ, स्कूल इटली प्लाजा), नूपुर तिवारी (अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्डी, ट्रांसफॉरमेशन कोच और फाउंडर ऑफ हील टोक्यो, जापान), मिस प्रिया शर्मा ( हेल्थ और बिहेवियर साइंस विभाग, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया), प्रो0 वीके मट्टू (एक्स चेयरमैन, हरि. किसान आयोग), प्रो0 अश्वनी ठाकुर (प्रसिद्ध मैथमेटिशियन, न्यू दिल्ली), प्रो0 सुनील बख्शी (चीफ मेंटरिंग ऑफिसर, एआरसी दिल्ली), इंजीनियर जितेंद्र के झांगड़ा (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर पीडीयू आईआईसी रूसा 2.0, एमएचआरडी जीजेयूएस एंड टी हिसार), डॉ0 बृजेश सिंह (प्रिंसिपल, पीजी कॉलेज सीमा, रोहड़ू) विशेष रूप से उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम में लगभग 150 लोगों ने भाग लिया। प्रो0 हरीश सांजटा इस कार्यक्रम के संयोजक रहे। इस कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ पर विस्तार से चर्चा हुई जिसमें कई बिंदु सामने आए।
डॉ0 प्रमोद चौहान (अतिरिक्त निदेशक उच्च शिक्षा, हिमाचल प्रदेश) ने क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020′ के कार्यान्वयन को लेकर हो रहे सेमिनार एवं संगोष्ठियों की सराहना करते हुए राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीमा में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के संदर्भ में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय वेबीनार’ के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ में जो प्रावधान है वह सर्वांगीण विकास की दृष्टि से बहुत अच्छे हैं। इससे काफी परिवर्तन होने वाला है पर इसके लिए शिक्षक, अभिभावक एवं विद्यार्थियों को जागरूकता अभियान चलाना पड़ेगा तथा उनके माइंडसेट में बदलाव लाना होगा, तभी इसके परिणाम अच्छे होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस शिक्षा नीति के तहत 2035 तक सकल नामांकन अनुपात 50% होना चाहिए जो कि अभी राष्ट्रीय स्तर पर 26. 3 % है और हिमाचल में यह उच्च शिक्षा में 39. 4% है। उन्होंने कहा कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार के उचित प्रयासों के चलते 2030 तक जीईआर 50% कर लेगा। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति राष्ट्र की प्रगति को गति प्रदान करने में सकारात्मक भूमिका निभाएगी और इस नीति से देश को विश्व गुरु बनाने में अवश्य मदद मिलेगी।
डॉ अंजू शर्मा (ओएसडी उच्च शिक्षा हिमाचल प्रदेश) ने कहा है कि नई शिक्षा नीति को डॉ0 के कस्तूरीरंगन व उनकी टीम ने गहन विचार-विमर्श के बाद ही तैयार किया है। जिसमें 2.5 लाख पंचायतें, 6600 ब्लॉक, 676 जिलों के लोगों से परामर्श करते हुए 1.25 लाख लोगों के सुझाव शामिल किए गए। इसके बाद ही 37.4 मिलीयन छात्रों के लिए 5 + 3 + 3 + 4 का फार्मूला तैयार किया गया।
नूपुर तिवारी (फाउंडर ऑफ हील टोक्यो, जापान) ने कहा है कि
1. शिक्षा स्थानीय भाषा में होनी चाहिए।
2. शिक्षा आपको सशक्त बनाएं न कि नौकरी चाहने वाले।
3 संस्कृत का प्रयोग होना चाहिए।
4. देशभक्ति को अपनाया जाना चाहिए।
5. अब हम अपने चार वर्षीय विश्वविद्यालयीय प्रणाली के साथ विश्व का मुकाबला कर सकते हैं।
6. विदेश से छात्र उच्च शिक्षा के लिए भारत आ सकते हैं।
7. यह शिक्षा प्रणाली ज्ञान पिपासा की पूर्ति करती है।
8. यह समग्र दृष्टिकोण के साथ सीखने के उद्देश्य में अधिक सहायक है।
9. यह शिक्षा प्रणाली विषय को चुनने और सीखने की बहुत स्वतंत्रता देती है।
10. यह शिक्षा प्रणाली हमें अधिक व्यावहारिक ज्ञान देगी और छात्रों को अधिक कुशल बनाएगी।
डॉ0 अपेर्णा वोलुरू (फाउंडर और सीईओ, स्कूल इटली प्लाजा) ने कहा है कि नई शिक्षा नीति में स्कूल शिक्षा पर फोकस किया गया है। यह शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली में नवाचार लाएगी। इसमें विद्यार्थियों के अर्ली स्टेज पर इनबार्न टैलेंट को पहचान कर उचित मार्गदर्शन द्वारा उनके भविष्य को उज्जवल बनाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि मेमरी टेक्निक, फोटो रीडिंग और अन्य सुपर ह्यूमन स्किन का भी नई शिक्षा नीति में प्रावधान होना चाहिए।
प्रिया शर्मा (क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया की छात्रा)
ने कहा है कि नई शिक्षा नीति में हमारे बच्चों की कांगनेटिव स्किल को पहचान कर शिक्षण और अधिगम के समग्र दृष्टिकोण को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नीति में त्रिभाषा फार्मूला एक बहुत अच्छी बात है जिसमें बच्चों को 5 साल तक शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ मातृभाषा, लोक भाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में निर्देश दिए जाएंगे। नौवीं से बारहवीं तक किसी भी विदेशी भाषा को सीखने का मौका मिलेगा। नई शिक्षा नीति पर जो बच्चों का मूल्यांकन होगा वह मेमोरी बेस्ड नहीं होगा बल्कि अलग-अलग स्किल्स के आधार पर परिणाम बनेंगे। इसमें को करिकुलर और स्पोर्ट्स की गतिविधियां भी विषय विशेष के तौर पर पढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के बाद ई लर्निंग में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इस नीति में ई लर्निंग को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति मैं एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) तथा एनालिसिस तथा क्रिटिकल थिंकिंग इस शिक्षा नीति की विशेषताएं हैं।
प्रोफेसर वीके मट्टू (एक्स चेयरमैन हरि किसान आयोग) ने कहा है कि
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, देश में शिक्षा के विकास के लिए बहु-विषयक एवं समग्र शिक्षा की दिशा में एक विशद एवं महत्वपूर्ण कदम है।
2. यह आधुनिक डिजाइनिंग के साथ पारंपरिक / वैदिक ज्ञान के विलय में मदद करेगा।
3. यह ब्रेन ड्रेन को रोकने और भारत को * आत्मम् निर्भार भारत * बनाने के लिए एक सकारात्मक कदम है।
4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारे देश में 100% साक्षरता दर के लिए निश्चितता देती है।
5. इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कौशल विकास / शिक्षा के व्यावसायिककरण पर अधिक बल दिया गया है।
6. नई नीति ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद करेगी ताकि छात्रों को वर्तमान महामारी जैसी किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाए।
7. स्नातक स्तर पर छात्र अपनी पसंद के विषयों का चयन स्ट्रीम में से कर सकते हैं और उनके पास कई निकास विकल्प होंगे।
8. यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालयों की स्थापना में मदद करेगी।
9. सरकारी और निजी शैक्षणिक निकायों को मान्यता और विनियमन नियमों के एक ही सेट द्वारा निर्देशित किया जाएगा।
10. इसमें क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए बहुत गुंजाइश और प्रावधान है।
11. इसमें विदेशी खिलाड़ियों को उच्च शिक्षा देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट
केंद्र स्थापित करने की अपार संभावना है।
प्रोफेसर सुनील बख्शी (चीफ मेंटरिंग ऑफिसर एआरसी दिल्ली) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इन बिंदुओं को सामने लाया है-
1. क्षेत्रीय / राष्ट्रीय भाषा पर बल
2. शिक्षाशास्त्र में बदलाव दृष्टि चिंतन
3. विकास के प्रथम चरण के लिए प्रशंसा।
4. कॉलेज शिक्षा में प्रवेश और निकास नीति का लाभ।
5. उच्च शिक्षा के प्रत्येक वर्ष पूरा करने के बाद डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा के लिए प्रशंसा।
6. फंड / बजट आपूर्ति के लिए चिंतन।
7. व्यावसायिक / कौशल आधारित शिक्षा का लाभ।
8. शिक्षा क्रेडिट बैंक।
9. 6% और जीडीपी के फंड में वृद्धि।
10. 2035 तक 50% नामांकन के लिए लक्ष्य। प्रोफेसर अश्वनीआज के ध्यान देने योग्य बिंदु हैं
1 क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना
2 सरकारी स्कूलों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर
3 राष्ट्रीय शिक्षा नीति का त्वरित कार्यान्वयन
4 अच्छे उत्साही शिक्षकों की भर्ती
5 शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का प्रतिशत बढ़ाना
6 स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देना
7 नौकरी प्रदाता बनाएं ना कि नौकरी चाहने वाले।
इंजीनियर झांगड़ा (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर पीडीयू आईआईसी रूसा 2.0 एमएचआरडी जीजेयूएस एंड टी हिसार) ने मेटा कौशल, नई शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम डिजाइन, कौशल विकास आदि बिंदुओं पर चर्चा की।
सीमा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 बृजेश ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से बच्चों को बचपन से ही वैज्ञानिक विचारधारा को विकसित करने का मौका मिलेगा।
2. इस शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के मापदंड विश्व स्तर की शिक्षा गुणवत्ता के मापदंड के समकक्ष होंगे।
3. इस शिक्षा नीति के तहत शिक्षा के स्तर को प्री स्कूल ( 5वीं तक), मिडिल स्कूल (छठी से आठवीं), हाई स्कूल (9वीं से 12वीं) और डिग्री को 12वीं कक्षा के बाद रखा गया है।
4. व्यवसायिक प्रशिक्षण छठी कक्षा से शुरू हो जाएगा छात्र आठवीं से बारहवीं कक्षा तक अपनी रुचि के विषय को चुन सकते हैं।
5. पूरे राष्ट्र में शिक्षक ट्रेनिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बोर्ड होगा।
6.राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से एजुकेशन इंडेक्स, स्किल रेशों, पेटेंट रेशो ,लीडरशिप रेशों, हैप्पीनेस इंडेक्स, हेल्थ इंडेक्स और एम्पलाएबिलिटी रेशों में वृद्धि होगी और इस शिक्षा नीति से भारत को सुपर पावर बनाने की संकल्पना भी निश्चित रूप से पूरी होगी।