सहयोगी देशों के साथ भारत के संबंध आपसी विकास और विश्‍वास के सिद्धातों पर आधारित: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अपने सहयोगी देशों के साथ भारत के संबंध आपसी विकास और विश्‍वास के सिद्धांतों पर आधारित हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत आर्थिक फायदे या मुनाफे को ध्‍यान में रखकर किसी देश के साथ संबंध नहीं रखता। श्री मोदी ने आज मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविन्‍द जुगनॉथ के साथ पोर्ट लुई में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए मॉरीशस के उच्‍चतम न्‍यायालय के नये भवन के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। इस मौके पर दोनों देशों की न्‍यायपालिकाओं के वरिष्‍ठ सदस्‍य और अन्‍य गण्‍यमान्‍य व्यक्ति भी उपस्थित थे ।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कोविड-19 से कारगर तरीके से निपटने पर मॉरीशस की जनता और सरकार को शुभकामनाएं दीं। मोदी ने  मॉरीशस के साथ भारत की विशेष मित्रता का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी जड़ें हमारे सांस्‍कृतिक संबंधों पर टिकी हैं।प्रधानमंत्री ने समूचे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास की अवधारणा पर भारत की आस्‍था का भी उल्‍लेख किया जिसे ‘सागर’ के नाम से भी जाना जाता है।

‘सागर’ की परि‍कल्‍पना प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में की थी।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविन्‍द जुगनॉथ ने उच्‍चतम न्‍यायालय के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत ने मारीशस के विकास संबंधी लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने में हमेशा मदद की है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्‍व में भारत-मॉरीशस संबंधों में मजबूती आयी है और ये नये स्‍तर पर पहुंचे हैं। उन्‍होंने कहा कि मॉरीशस विकास परियोजनाओं को पूरा करने में प्रधानमंत्री मोदी की सहायता के लिए आभारी है। उन्‍होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्‍प का भी जिक्र किया।

मॉरीशस के उच्‍चतम न्‍यायालय का नया भवन भारत की तीन करोड डॉलर की सहायता से बनाया गया है। यह मॉरीशस में भारत के सामाजिक-आर्थिक पैकेज के तहज चलाई जा रही पांच परियोजनाओं में से एक है।