भारत और चीन एलएसी पर स्थिति के बारे में पांच बिन्‍दुओं पर सहमत हुए

मॉस्‍को में शंघाई सहयोग संगठन देशों के मंत्रियों के सम्‍मेलन के अवसर पर विदेश मंत्री डॉक्‍टर एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों मंत्रियों ने वास्‍तविक नियंत्रण रेखा से जल्द अपनी अपनी सेना पीछे हटाने और तनाव दूर करने के उपाय करने पर सहमति व्‍यक्‍त की।दोनों विदेश मंत्री इस बात पर सहमत थे कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति किसी भी देश के हित में नहीं है और दोनों देशों के सैन्‍य अधिकारियों को बातचीत जारी रखनी चाहिए तथा सीमा पर समुचित दूरी बनाए रखनी चाहिए।

दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए कि मतभेदों को विवादों का रूप लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और भारत – चीन संबंधों के विकास में दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति के अनुसार आगे बढना चाहिए।द्विपीक्षीय बैठक के बाद जारी संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में बताया गया कि दोनों विदेश मंत्रियों ने सीमा संबंधी सभी मौजूदा समझौतों तथा नियमों का पालन करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने पर भी सहमति जताई।

दोनों मंत्रियों ने किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचने पर भी सहमति व्‍यक्‍त की जिससे तनाव बढ़ने की आशंका हो। दोनों देश, विशेष प्रतिनिधि व्‍यवस्‍था और भारत-चीन सीमा संबंधी मामलों में परामर्श और समन्‍वय के लिए कार्य तंत्र के जरिए वार्ता जारी रखेंगे। डॉक्‍टर जयशंकर और श्री वांग यी ने स्थिति में सुधार आने पर विश्‍वास का माहौल पैदा करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के नए उपायों की आवश्‍यकता पर भी सहमति जताई।

सूत्रों के अनुसार डॉक्‍टर जयशंकर ने कहा कि 1976 में राजदूत स्‍तर के संबंध फिर स्‍थापित होने तथा 1981 से सीमा वार्ताएं शुरू होने से भारत और चीन के रिश्‍ते काफी हद तक मजबूती की स्थिति में आए।भारत की ओर से कहा गया कि सीमा संबंधी मामलों के समाधान में समय और प्रयास की जरूरत है और यह भी स्‍पष्‍ट है कि आगे रिश्‍तों को मजबूत करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों पर शांति बनाए रखना भी आवश्‍यक है।पूर्वी लद्दाख में हाल की घटनाओं ने द्विपक्षीय संबंध पर निसंदेह असर डाला है, इसलिए मौजूदा स्थिति का तत्‍काल समाधान दोनों देशों के हित में है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि भारतीय पक्ष ने बैठक में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर बड़ी संख्‍या में चीनी सैनिकों के साजो-सामान के साथ तैनाती पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की।सैनिकों की इतनी बड़ी संख्‍या में तैनाती 1993 और 1996 के समझौतों के अनुरूप नहीं है और वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर गति‍रोध उत्‍पन्‍न हुआ है। चीन ने इस तैनाती के लिए कोई ठोस स्‍पष्‍टीकरण नहीं दिया है। वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सैनिकों की ओर से की गई अकारण कार्रवाईयों ने द्विपक्षीय समझौतों और संधियों के प्रति असम्‍मान व्‍यक्‍त किया है। भारतीय पक्ष ने स्‍पष्‍ट किया कि वह सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन पर सभी समझौतों का पूरी तरह पालन किये जाने की उम्‍मीद रखता है और एकतरफा यथास्थिति को बदलने की किसी भी कोशिश को स्‍वीकार नहीं करेगा। भारत ने यह भी कहा कि भारतीय सैनिकों ने सीमावर्ती इलाकों के प्रबंधन से जुड़े सभी समझौतों और संधियों का पूरी निष्‍ठा से पालन किया है।