हिमाचल में आमदनी कम हुई, महंगाई बढ़ी

शिमला: कोरोना संकट (Corona Virus) के बीच जनता को उम्मीद थी कि महंगाई को लेकर सरकार की ओर से राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. महंगाई का मीटर लगातार दौड़ता जा रहा है और उसमें आग लगाने का काम किया है पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Rates) ने. पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) के दाम दिन प्रतिदिन इतिहास बनाते जा रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद प्रदेश में बीते 6 महीनों के भीतर पेट्रोल की कीमतों में 9 रुपये 32 पैसे और डीजल के दामों में 10 रुपये 31 पैसे प्रति लीटर (Litre) की बढ़ौतरी हुई.

इस तरह बढ़े दाम
1 अप्रैल 2020 को शिमला में पेट्रोल की कीमत 70 रुपये 91 पैसे और डीजल के दाम 62 रुपये 47 पैसे प्रति लीटर थे. 1 मई को कोई बदलाव नहीं हुआ तो 1 जून को पेट्रोल के दाम 71 रुपये 91 पैसे और डीजल की कीमत 63 रुपये 47 पैसे तक पहुंच गई. 1 जुलाई को एकाएक पेट्रोल के दाम 79 रुपये 02 पैसे और डीजल की कीमत 72 रुपये 12 पैसे तक पहुंच गई. मौजूदा समय में शिमला में पेट्रोल की कीमत है 80 रुपये 23 पैसे और डीजल के दाम 73 रुपये 32 पैसे प्रति लीटर पहुंच गए हैं.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाया गया
कोरोना दौर के इन 6 महीनों को देखें तो साफ नजर आ रहा है कि किस तरह से एक सुनियोजित तरीके से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाया गया. जैसे-जैसे लॉकडाउन से अनलॉक करने की प्रकिया शुरू की गई और जनता को छूट मिलनी शुरू हई. आना-जाना आसान होता गया, वैसे ही कीमतों को एकदम बढ़ा दिया गया. पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, महंगाई बढ़ गई है. एक तरफ रोजगार कम हुए, लोगों की नौकरियां चली गईं, आमदनी कम हो गई, वहीं दूसरी तरफ लोगों को राहत देने के बजाए महंगाई का हथौड़ा चला दिया.