पूर्व सीबीआई निदेशक और पूर्व डीजीपी हिमाचल ने घर में किया सुसाइड

मणिपुर- नगालैंड के पूर्व गवर्नर, सीबीआई के पूर्व निदेशक और हिमाचल के पूर्व डीजीपी अश्वनी कुमार ने बुधवार शाम को छोटा शिमला स्थित अपने घर ब्रोक होस्ट में आत्महत्या कर ली। उन्होंने अलग कमरे में जाकर रस्सी से लटक कर सुसाइड किया है। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है।
जानकारी मिलते ही डीजीपी, एडीजीपी समेत शिमला के एसपी मोहित चावला भी मौके पर पहुंचे। हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस सुसाइड नोट को साझा नहीं कर रही थी। सूत्रों के अनुसार उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं जिंदगी से तंग हो गया था। उधर, फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल का जायजा लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए आईजीएसमी भेजा गया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही थी।
1973 बैच के आईपीएस डा. अश्वनी कुमार सिरमौर जिला के नाहन के रहने वाले थे। प्रदेश में डीजीपी के पद पर रहते हुए ही उनकी नियुक्ति सीबीआई के निदेशक पद पर हुई। सीबीआई के निदेशक बनने से यह साफ था कि डा. कुमार न केवल स्वच्छ और ईमानदार छवि के मालिक बल्कि एक होनहार काबिल पुलिस अफसर भी थे। सीबीआई से रिटायर होने के कुछ माह बाद ही केंद्र सरकार ने उन्हें मणिपुर-नगालैंड का गवर्नर भी बनाया। गवर्नर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह राजधानी शिमला के एक निजी विश्वविद्यालय में वाइस चांलसर भी रहे। लॉकडाउन से कुछ समय पहले वह अपने बेटे के पास मुंबई में भी रहे और कुछ समय पहले ही राजधानी लौटे थे। जिस विश्वविद्यालय में वह वाइस चांसलर रहे, वहां इस समय फर्जी डिग्री प्रकरण की जांच भी हो रही है। अभी पुलिस इस पर कुछ भी बोलने से बच रही है। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील है, ऐसे में पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।
सुसाइड नोट में लिखी ये बात

डीजीपी ने कहा कि उन्होंने सुसाइड नोट में इसके लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है. उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में अश्वनी कुमार ने लिखा है कि गंभीर बीमारी के चलते वह यह कदम उठा रहे हैं. इसमें उन्‍होंने किसी को दोषी नहीं ठहराया है. सब खुश रहें यह कामना की है. सुसाइड नोट में आगे लिखा है- अपनी इच्छा से यह जीवन समाप्त कर अगली यात्रा पर निकल रहे हैं.

पुलिस कर रही है जाँच
वहीं पुलिस सूत्रों से जानकारी मिली है कि इनकी सुरक्षा में भी एक पुलिस जवान तैनात रहता था। करीब शाम पांच और छह बजे के आसपास इन्होंने सुसाइड किया है। इनकी पत्नी भी घर में ही थी। ऐसे में पुलिस उनसे भी पूछताछ कर रही है। एसपी शिमला मोहित चावला का कहना था कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। हर पहलू की जांच की जा रही है।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर थे
हालांकि इस विश्वविद्यालय के विवादों में आने भी वह व्यथित माने जाते थे। अब अचानक उनके इस तरह से दुनिया छोड़ देने की सूचना सुनने के बाद पूर्व पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी, डीएस मन्हास आदि को सब स्तब्ध हैं। प्रदेश के करीब रहे बहुत से लोगों को उनके इस तरह से जाने का विश्वास नहीं हो रहा है। सवाल यह है कि क्या इतना मजबूत आदमी जिंदगी से उकताने जैसे बात कर आत्महत्या कैसे कर सकता है, कोई तो बात रही होगी जो इतनी बड़ी हो चुकी थी।
हर कोई उनका अभिवादन करता था तो वह मुस्कराकर जवाब देते थे। उनकी कार्यशैली और कर्मठता का पुलिस विभाग का हर आम और खास आदमी मुरीद था। किसी विषय पर बात करनी होती थी तो वह आईजी, डीआईजी या एसपी को नहीं, उनके अधीनस्थ क्लर्कों, अधीक्षकों को खुद फोन करते थे, उनसे जानकारी लेते थे। पुलिस कर्मचारियों के कल्याण की भी उन्होंने कई योजनाएं चलाईं। हिमाचल के अपने पुलिस अधिनियम का खाका भी उनके समय में बना। पुलिस के मददगारों के लिए भी उन्होंने पुरस्कार योजना शुरू की। हिमाचल में जब धूमल सरकार के सत्ता में आने के बाद वर्ष 2008 में उनका चयन यूपीए सरकार में सीबीआई के निदेशक पद के लिए हो गया था। यह हिमाचल के लिए गौरव की बात बनी। उन्हीं के सीबीआई निदेशक रहते शिमला में सीबीआई की इकाई शाखा में स्तरोन्नत हुई।