शहीद अनिल चौहान के परिवार को सरकार से मिले झूठे वादे, लौटाया कीर्ति चक्र

कांगड़ा: जिले के जयसिंहपुर के कीर्ति चक्र विजेता शहीद अनिल चौहान (Anil Chauhan) के परिवार ने बेटे की शहादत पर सरकार से मिले झूठे वादों से नाराज होकर कीर्ति चक्र को लौटा दिया है. कीर्ति चक्र को लौटाने के लिए शहीद के परिजन राजभवन पहुंच गये और राज्यपाल के माध्यम से इस पुरस्कार को सरकार को लौटा दिया.

कांगड़ा जिले की तहसील जयसिंहपुर के गांव के चंबी के अनिल चौहान 2002 में असम में शहीद हुये थे. उनकी शहादत पर उन्हें कीर्ति चक्र से नवाजा गया था. उसी वक़्त तत्कालीन सरकार ने शहीद के नाम पर स्मारक बनाने और शहीद के नाम पर स्कूल का नाम रखने की घोषणा की थी. लेकिन 18 साल के बाद भी सरकार ने दोनों वादे पूरे नहीं किए. इस बात से नाराज होकर शहीद अनिल का परिवार सोमवार को कीर्ति चक्र लौटने राजभवन पहुंच गया.

शहीद की मां राजकुमारी का कहना है कि 23 साल के बेटे ने 2002 में असम में अपनी शहादत दी थी. उस वक़्त वीरभद्र सरकार ने अनिल के नाम पर स्कूल का नाम रखने और स्मारक बनाने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ. 18 साल तक वादा पूरा न करना शहीदों का अपमान है. इसलिए वह कीर्ति चक्र लौटने आई हैं.

मुख़्यमंत्री से मिला शहीद का परिवार
राजभवन के मुख्य गेट पर शहीद के परिवार ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से मुलाकात की. सीएम ने उनसे बात की और उनकी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया. शहीद के परिवार को देखकर उन्होंने गाड़ी रोकी और शहीद के परिवार से बातचीत की. सीएम ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन अब पूरे मामले का पता करके कारवाई करेंगे.

शहीद के परिजनों और उनके चाहने वाले लोगों का आरोप है कि सरकार को चुनाव के समय वोट लेने के लिए सभी बातों की याद आती है. इसके बाद सब कुछ भूल जाता है. एक शहीद के परिवार से 18 साल पहले किये गये वादे को सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया. इससे साफ पता चलता है कि सरकारों को सेना के जवानों से नहीं सिर्फ अपनी कुर्सी से प्रेम है.