विपक्षी विधायकों का सदन से वाकआउट, बाहर आकर कि नारेबाजी

सदन में चार विधायकों को समय न दिए जाने पर कांग्रेस ने जमकर अपना विरोध जताया। नारेबाजी करते हुए विपक्षी विधायक सदन से बाहर आकर नारेबाजी करते रहे। विपक्ष का आरोप था कि नियम-67 के तहत स्थगन प्रस्ताव कांग्रेस लाई थी। बावजूद इसके विरोधी दल के चार विधायकों को सदन के भीतर बोलने के लिए समय ही नहीं दिया गया। मंगलवार को दोनों पक्षों के नेताओं को चर्चा पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब इसका उत्तर मुख्यमंत्री बुधवार सुबह देंगे। इस पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सीएम के रिप्लाई से पहले कांग्रेस के उन चार विधायकों को भी बोलने का मौका दिया जाए, जिन्होंने चर्चा के लिए आग्रह किया है। लिहाजा इससे खफा होकर विपक्ष ने वाकआउट किया।

विपक्षी सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए

सदन में विपक्षी सदस्यों ने मांग की थी कि स्वास्थ्य मंत्री के बोलने से पहले कांग्रेस के सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी यह बात नहीं मानी और स्वास्थ्य मंत्री डा. राजीव सैजल को अपनी बात रखने के लिए कह दिया। इससे खफा विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जाए और उनके सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी और फिर विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ऐसी क्या जल्दी थी कि सदन की कार्यवाही पांच बजे की समाप्त करनी थी। उन्होंने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जा सकता था, लेकिन अध्यक्ष ने समय नहीं बढ़ाया।

चार सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए था
उन्होंने कहा कि हाउस का समय बढ़ाया जा सकता था। मंत्री भी बुधवार को जवाब दे सकते थे। उनके चार सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए था, लेकिन स्पीकर ने मंत्री के नाम का ऐलान कर दिया कि वे अपनी बात रखेंगे। उन्होंने सवाल किया कि कितने मंत्री बोलेंगे। मंगलवार को कई मंत्रियों ने बोला है और ऐसे में सदस्यों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि यह स्थगन प्रस्ताव विपक्ष का है और उनके सदस्यों को ही बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार, विपक्ष को फेस नहीं कर पा रही है और इस कारण उनके सदस्यों को बोलने का मौका नहीं दिया गया।

अग्निहोत्री ने कहा कि उनके बाकी बचे चार विधायकों ने भी कोविडकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार को उजागर करना था और इससे कांग्रेस को रोका गया है। विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को फेस करने के लिए सरकार को पूरे मंत्रियों की फौज को उतारना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों को बोलने से रोका जा रहा है। प्रदेश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मामले पर नेता प्रतिपक्ष ने सीएम समेत सभी मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की।