भारत को मुक्त, पारदर्शी, समावेशी और नियम-आधारित वैश्विक सुरक्षा संचरना के विकास के लिए प्रतिबद्ध: रक्षामंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिर कहा है कि भारत एक ऐसी वैश्विक सुरक्षा संरचना के विकास के लिए वचनबद्ध है जो मुक्‍त, पारदर्शी, समावेशी और नियम-आधारित हो तथा अंतर्राष्‍ट्रीय कानूनों से जुड़ी हुई हो। आज मॉस्‍को में शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ, सोवियत संघ से अलग हुए स्‍वतंत्र राष्‍ट्रों के संगठन-सीआईएस और संयुक्‍त सुरक्षा संधि संगठन- सीएसटीओ के सदस्‍य देशों की संयुक्‍त बैठक को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी शंघाई सहयोग संगठन से जुड़े सदस्‍य देशों के दायरे में आती है। उन्‍होंने कहा कि दुनिया में एक-दूसरे पर भरोसे और सहयोग, अनाक्रमण, अंतर्राष्‍ट्रीय कायदे-कानून के प्रति सम्‍मान, एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता तथा मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पारम्‍परिक और गैर-पारम्‍परिक खतरों के साथ-साथ आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्‍करी और अंतर्राष्‍ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए संस्‍थागत क्षमताओं का विकास करने की आवश्‍यकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों की एक स्‍वर से निंदा करता है और इसे समर्थन देने वालों की भी भर्त्‍सना करता है। उन्‍होंने आतंकवाद विरोधी क्षेत्रीय ढांचा बनाने के प्रयास करने के लिए शंघाई सहयोग संगठन के कार्यों की प्रशांसा की। उन्‍होंने कहा कि एससीओ परिषद ने आतंकवाद के विरूद्ध जो उपाय किए हैं वे बहुत महत्‍वपूर्ण कदम है और उनसे आतंकवादी दुष्‍प्रचार की रोकथाम में मदद मिली है। श्री सिंह ने आतंकवाद विरोधी वार्षिक शांति मिशन के आयोजन के लिए रूसी परिसंघ के प्रति भारत का आभार व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने कहा कि इससे आपसी भरोसा कायम करने और प्रतिरक्षा सेनाओं द्वारा एक-दूसरे के अनुभवों का फायदा उठाने में मदद मिली है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अभी हम सबके लिए सुरक्षा और विकास के लक्ष्‍य को पूरी तरह प्राप्‍त करने में सफल नहीं हुए हैं और अफगानिस्‍तान की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उन्‍होंने कहा कि भारत, अफगानिस्‍तान में अफगान लोगों के नेतृत्‍व में और उन्‍हीं के द्वारा नियंत्रित शांति प्रक्रिया को समर्थन देना जारी रखेगा। श्री सिंह ने कहा कि भारत, फारस की खाड़ी की स्थिति को लेकर भी बहुत चिंतित है। उन्‍होंने कहा कि खाड़ी के सभी देशों से भारत के सभ्‍यतागत संबंध हैं और हमारे अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हित भी उनसे जुड़े हुए हैं।

रक्षा मंत्री ने कोविड-19 महामारी की वजह से अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने कहा कि इसने दुनिया के देशों को इस बात का एहसास करा दिया है कि प्रकृति पर मनुष्‍य का वश नहीं है और प्राकृतिक आपदाएं राष्‍ट्रीयता की सीमाओं को नहीं मानतीं। उन्‍होंने दुनिया के देशों को आपदाओं निपटने के लिए एकजुट हो जाने की आवश्‍यकता पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अपने प्रियजनों से बिछुड़ने का दुख मनाते हुए हमें एक समूची पीढ़ी के उन लाखों लोगों के बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्‍होंने द्ववितीय विश्‍व युद्ध में अपना जीवन बलिदान किया। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व युद्ध हमें एक देश के दूसरे देश पर आक्रमण करने की व्‍यर्थता की याद दिलाता है क्‍योंकि ऐसे आक्रमणों से विनाश के अलावा और कुछ हासिल नहीं होता। उन्‍होंने कहा कि भारत और पूर्व सोवियत संघ के लोगों के पूर्वजों ने आक्रामकता और विस्‍तारवाद से निपटने में सर्वोच्‍च बलिदान किए थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस साल 24 जून को मॉस्‍को में आयोजित विजय दिवस परेड में भारत की भागीदारी विश्‍व को फासीवाद, नाजीवाद और विस्‍तारवाद से मुक्‍त कराने में सोवियत संघ के अनोखे योगदान के प्रति भारत के सम्‍मान के रूप में देखा जाना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह वर्ष द्ववितीय विश्‍व युद्ध के समाप्‍त होने और संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍थापना का 75वां जयंती वर्ष है। श्री सिंह ने कोरोना महामारी से सफलतापूर्वक निपटने के लिए रूस के लोगों और वहां की सरकार को शुभकामनाएं दी। उन्‍होंने स्‍पुतनिक-5 टीके की खोज के लिए रूसी वैकानिकों और चिकित्‍सकर्मियों के प्रयासों की भी सराहना की।