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साहित्य

everlastingmemories

तुम हो तो हो ही, चाहे हम बात नहीं करते खा़मोशियों में भी कभी जज़्बात नहीं मरते । दिल के झरोखों से हर पल निहारते हैं...

करोने दी गल

सारयाँ लोकां च हुन इको ही गल इस करोने दा नी कोई हल.... कनक भू ग्ये चकोई , फोनां दे रिचार्ज गे होइ , मित्रां रिस्तेदारां ने कर...

गूंगे लोग

रौंदते हैं अरमानों को वो जब्र करते हैं पैमाना छलक जाए चाहे हम सब्र करते हैं । मुस्तकबिल टंगा सूली पर उफ़ नहीं करते हैं कोई सुन ना ले हमारा...

स्वतंत्रता

मेरी सवेच्छा मेरी अभिव्यक्ति मेरे शब्द देते प्रमाण हूं मैं स्वतंत्र । पर यह स्वतंत्रता है एक बंधन ही करने पड़ते निर्वाह कुछ कर्तव्य भी, कि मेरी इच्छा ना बने किसी की अनिच्छा, अभिव्यक्ति का ना हो...

आत्मनिर्भर

अब खा़मोश बैठा हूं मूकदर्शक बना । हाथ कटे जु़बान सिली है , मेरी उड़ान से ही यह सजा़ मिली है । कभी उमंगें हिलोरें मारती विश्वास साथ निभाता, और रह-रह कर दिमाग़...

सांझे पल

सांझे पल सोचता हूं अब सपनों को विराम दे दूं तो अच्छा । वो टूटे क्यों ? खुद पर ही इल्ज़ाम ले लूं तो अच्छा । बेवफा़ कौन ? मैं अपना ही...

“गुरु जी”

"गुरु जी" वह अच्छा थाबड़ा मिलनसार ,सबको देता इज्जतसबसे पाता दुलार।लिखने में भीअजीब ताकत थी ।झकझोर देताहर रचना से...

मजदूर हुआ मजबूर

मजदूर हुआ मजबूर देखो कैसी विपदा आई शहर से गांव के लिए "मजबूर" है मजदूर मेरा भाई..... गया रोजगार, हुआ बेरोजगार, पटरी पर कई हजारों मील, चलने को बेबस है...

ज़िंदगी की थमी रफ़्तार : लॉकडाउन

चार दीवारों के मकान को घर कहते है ज़िंदगी की थमी रफ़्तार ने सिखाया है मानों घर की तोरण से लेकर गार्डन बनी बालकनी...

देश को बचाना है तो सोशल डिस्टेंसिंग को जीवन में अपनाना जरूरी: पूजा मिश्रा

यह बात किसी से नहीं छुपी की पूरे विश्व में कोरोना ने अपने पाँव पसार दिए है, और अब भारत भी इससे...