सड़क दुर्घटनाओं में होगी कमी, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बी.टेक इंजीनियरिंग छात्र ने बनाया सॉफ्टवेयर

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बी.टेक इंजीनियरिंग में सेकंड ईयर स्टूडेंट मोहित कुमार ने सड़क दुर्घटनाओं से निजात पाने के लिए सॉफ्टवेयर निर्मित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मोहित ने इस सॉफ्टवेयर को मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर विकसित किया है, जो सीट बेल्ट का उपयोग न करने, शराब पीकर गाड़ी चलाने, इंडिकेटर का प्रयोग न करने, ट्रैफिक जाम और कोहरे जैसे प्रमुख कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोक सकता है। डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोड एक्सीडेंट की वजह से हर साल 10 लाख लोग अपनी जान गँवा देते हैं, वहीँ तकऱीबन 5 लाख जख्मी होते हैं। इसके अतिरिक्त दुनियाभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भारत नंबर 1 पर है और इसी कारण कुल घरेलू उत्पादन में देश को 3 लाख करोड़ का नुक्सान उठाना पड़ता है। भारत में प्रतिदिन रोड एक्सीडेंट में 400 लोग मारे जाते हैं, जो कि देश के लिए बहुत चिंताजनक विषय है। इसी के मद्देनजर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र और टॉप 100 टेक इन्नोवेटर्स और प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल मोहित कुमार ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जो सड़क हादसों को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगा और मोहित ने सॉफ्टवेयर का सफलतापूर्वक पेटेंट फाइल कर दिया है।

100 टेक इन्नोवेटर्स में शामिल मोहित कुमार ने सफलतापूर्वक फाइल किया सॉफ्टवेयर पेटेंट
मोहित द्वारा निर्मित इस सॉफ्टवेयर की एक अनूठी विशेषता है कि बिना सीट बेल्ट बांधे कार स्टार्ट नहीं होगी। सीट बेल्ट पर 3 सेंसर हैं, जिससे सीट बेल्ट बांधने बाद ही कोई व्यक्ति कार चला सकेगा। ड्रंकन ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं का तीसरा बड़ा कारण है और यह सॉफ़्टवेयर उन लोगों को भी ड्राइविंग करने से रोकेगा, जिन्होंने 0.08 प्रतिशत की अनुमति दर से ज्यादा शराब का सेवन किया होगा। जैसे ही व्यक्ति स्टीयरिंग को छूएगा, तो नशे की हालत में वह कार को शुरू करने में सक्षम नहीं होगा। इसके अलावा, अगर वह शराब का सेवन करता है, तो उसकी सांस सेंसर को ट्रिगर कर देगी। इतना ही नहीं, इस सॉफ्टवेयर की मदद से, इंडिकेटर का उपयोग किए बिना वाहनों की लापरवाह ओवरटेकिंग के कारण अधिक दुर्घटनाएं नहीं होंगी, क्योंकि यह सॉफ्टवेयर गूगल मैप्स के साथ कनेक्टेड होगा और जैसे ही ड्राइवर एक लेन को स्विच करने वाला है, तो यह सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से इंडिकेटर चालू करेगा। सड़क दुर्घटनाओं का एक और कारण फोग व कोहरा है। इस सॉफ्टवेयर में एक इनबिल्ट अल्ट्रसोनिक रडार सिस्टम है, जो आपको यह बताता है कि 50 मीटर के दायरे में आपके रस्ते में कोई (वस्तु/ प्राणी) है या नहीं। मोहित द्वारा निर्मित किए गए इस सॉफ्टवेयर को विकसित करते समय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सभी नियमों और विनियमों का पालन किया।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी न केवल दुनिया के लिए पेशेवर तैयार कर रही है, बल्कि समाज को वापस देने की भावना भी पैदा करती है। उत्तर भारत में सबसे तेजी से विकसित हो रहे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्टार्टअप एमके ऐप क्रिएटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और सीईओ व यूनिवर्सिटी के छात्र मोहित कुमार ने 1 साल के भीतर स्पोर्ट्स और टेक्नोलॉजी सहित विभिन्न क्षेत्रों में 6 स्टार्ट-अप और 24 पेटेंट दर्ज किए हैं। यह ऐप गेम डेवलपमेंट, मोबाइल ऐप डेवलपमेंट, लोगो डिज़ाइन, वेब डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, साइबर सिक्योरिटी जैसे सभी संभव इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (आईटी) समाधान प्रदान करता है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर स. सतनाम सिंह संधू ने कहा कि रिसर्च-इनोवेशन, तकनीक और औद्योगिक क्षेत्र में सफलता हासिल करने वाले यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों में मोहित कुमार विशेष छात्रों में से एक है, जिसने महज 17 साल की उम्र में स्काई मैसेंजर नाम का ऐप बनाया था, जिसके बेहतरीन फीचर्स के फलस्वरूप ब्राज़ील, जापान, जर्मनी, यूनाइटेड स्टेट और बेल्जियम सहित 160 देशों के लोगों द्वारा डाउनलोड किया गया। बता दें स्काई मैसेंजर एप के जरिए सेंड किए जा चुके मैसेज को 24 घंटे के अंदर कभी भी एडिट किया जा सकता है, वहीँ सीक्रेट चैट और गेम अडॉप्टमेन्ट का ऑप्शन भी है।

स. संधू ने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी अ ने छात्रों को आधुनिक और व्यावहारिक लर्निंग मुहैया करवा रही है और रिसर्च व इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए उचित मार्गदर्शन तथा सहयोग प्रदान करती है। स, संधू ने बताया कि विद्यार्थियों को खोज और अनुसंधान के लिए अनुकूल माहौल व अवसर मुहैया करवाने के लिए 20 से अधिक रिसर्च ग्रुप तथा 30 से अधिक अल्ट्रा मॉडर्न आएंडडी रिसर्च लैब स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि इनोवेशन और रिसर्च आधुनिक भारत का आधार है और इसीलिए यूनिवर्सिटी में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए के विशेष बजट का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है ऑफिसर कंट्रोलर जनरल ऑफ़ पेटेंट डिज़ाइन एंड ट्रेडमार्क, भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018-19 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट और फैकल्टी 336 पेटेंट दर्ज कर देश में पहले स्थान पर रही है, वहीँ अब तक यूनिवर्सिटी 800 से अधिक पेटेंट की दर्जाबन्दी कर चुकी है। अंत में स. संधू ने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूआं, युवा पीढ़ी को आधुनिक क्षेत्र की आकाँक्षाओं के अनुसार प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए भविष्य के पेशेवर तैयार कर रही है, जिससे यूनिवर्सिटी के छात्र राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कौशल का लोहा मनवा रहे हैं।