पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सेना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और उपकरणों के साथ पूरी तरह से तैयार

पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सेना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और उपकरणों के साथ पूरी तरह से तैयार है। पिछले 20 वर्ष में सेना को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में लड़ाई के लिए उपयुक्त रक्षा उपकरण, भोजन और अस्त्र-शस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं।

देश के जवान अपनी मातृ भूमि की रक्षा के लिए लद्दाख में गर्व से सीना ताने खड़े हैं। सेना ऐसे सैनिकों का चयन करने के लिए पूरी सावधानी बरतती है जो इससे पहले भी इस क्षेत्र में तैनात रहे और विपरीत मौसम में भी उन्होंने पूरी तत्परता से अपना कर्तव्य निभाया। इसके अलावा सेना को किसी आकस्मिक स्थिति से निपटने और लंबे समय तक डटे रहने के लिए सभी आवश्यक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इस क्षेत्र में तैनात सेना की प्रत्येक ईकाई पहले भी यहां तैनात रही है और कुछ तो क्षेत्र में चार बार सेवा दे चुकी हैं। जवानों को  सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि वे इस दुर्गम क्षेत्र में बीस डिग्री सेल्सियस से लेकर शून्य से पचास डिग्री नीचे के तापमान पर भी अपना कर्तव्य निभाते रहें।

करगिल युद्ध में जीत और अनुभव के बाद पिछले 20 वर्ष में सेना ने विपरीत हालात को अनुकूल बनाने के लिए दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के युद्ध में निपुणता हासिल कर ली है। इसके परिणाम हाल ही में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सबने देखे। दुनिया के कई देश अब अत्यधिक विषम परिस्थितियों में युद्ध के लिए भारतीय सेना के मॉडल का अनुकरण कर रहे हैं।