प्रदेश सरकार ने 500 करोड़ और कर्ज लिया, अभी तक दो हजार करोड़ से ऊपर लिया गया कर्ज

परे विश्व की तरह हिमाचल प्रदेश में कोरोना की महामारी से खस्ताहाल हुई वित्तीय स्थिति के बीच सरकार ने 500 करोड़ और कर्ज लिया है। यह राशि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से मिल गई है। इसके साथ कर्ज का आंकड़ा इस साल दो हजार करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। पिछले महीने सरकार ने लोन नहीं लिया था, मगर इस बार वित्तीय प्रबंधन के लिए लोन लेना जरूरी हो गया था। सूत्र बताते हैं कि आने वाले कुछ दिनों में और लोन लिया जाएगा, क्योंकि अभी तक देनदारियां सरकार पर हैं। पुराने लोन का भुगतान इसमें अहम है, जिसके लिए सरकार को पैसा चाहिए, वहीं जीएसटी की एवज में जो राशि केंद्र सरकार से मिलनी थी, वह नहीं मिल पाई। इससे भी यहां पैसे की किल्लत हो गई है। जीएसटी काउंसिल ने प्रदेश को जो विकल्प दिया था, उसे अपना लिया गया है, जिसे अभी केंद्र सरकार से मंजूरी मिलनी है।
आने वाले कुछ महीनों में लोन की पद सकती है जरुरत
जीएसटी काउंसिल ने लोन लेने का विकल्प दिया है, जिसे हिमाचल ने अपनाया है। इस संबंध में एक पत्र हिमाचल की तरफ से जीएसटी काउंसिल को भी भेजा गया है। जीएसटी की एवज में सरकार 1625 करोड़ रुपए तक का लोन हासिल कर सकती है, जिसकी ब्याज दर कम होगी और ब्याज कौन देगा, इस पर बात चल रही है। ऐसे में यहां अपनी परिसंपत्तियों की एवज में सरकार के वित्त महकमे ने कुछ दिन पूर्व ही 500 करोड़ रुपए के लोन के लिए आवेदन किया था जिसकी राशि उसे मिल गई है। बताया जाता है कि इस महीने लोगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी समय पर नहीं दी जा सकी, क्योंकि पैसा नहीं था, मगर अब क्योंकि पैसा मिल गया है लिहाजा यह पेंशन भी जारी कर दी जाएगी। सरकार की लोन लेन की लिमिट पांच हजार करोड़ रुपए तक की पहुंच चुकी है, जिसके अलावा जीएसटी की एवज में भी लोन लिया जा सकता है, मगर अभी तक दो हजार करोड़ रुपए से कुछ ज्यादा राशि ही ली गई है, परंतु आने वाले कुछ महीनों में ज्यादा लोन की जरूरत पड़ेगी।
कोरोना महामारी से प्रदेश सरकार को 30 हजार करोड़ का नुकसान
कोरोनाकाल में पहले ही सरकार को 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो चुका है, जिस पर अब रियायतें देकर अलग-अलग सेक्टर को चलाया जा रहा है। कई बोर्ड-निगमों के पास कर्मचारियों के वेतन तक को पैसा नहीं है। ऐसे में लोन के सहारे पर ही सरकार की नैया है, जो कब तक चलेगी, यह देखना होगा।