हिमाचल : प्राइवेट स्कूल अपनी इच्छा से पूरी फीस ले सकते हैं

स्कूल फीस के मामले पर उपजे विवाद के बीच हिमाचल सरकार ने हाई कोर्ट के सामने मंगलवार को अपना पक्ष रख दिया है। हाई कोर्ट ने पिछले दिनों स्कूलों द्वारा फीस वसूली को लेकर आदेश किए थे, जिस पर मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया। इसके तहत निजी स्कूल कोविडकाल के दौरान की फीस भी वसूल सकते हैं। सरकार ने मंगलवार को प्रदेश उच्च न्यायालय के सामने कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की सूचना देते हुए अपना पक्ष रखा। सरकार पहले ही अदालती आदेशों की अनुपालना कर चुकी है। लिहाजा हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा दायर की गई याचिका को डिसमिस कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश के लोगों को स्कूलों को पुरानी फीस देने का सरकार का फैसला लागू हो गया है।
यह मामला अदालत में न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान व ज्योतस्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ में लगा है। राज्य के कई प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन कोर्ट तक पहुंचे थे, जिन्हें यह राहत दी गई है। ऐसे में अब प्राइवेट स्कूल पूरी फीस लेने के लिए अधिकृत हो गए हैं। अब प्राइवेट स्कूल अपनी इच्छा से पूरी फीस ले सकते हैं। इसके अलावा मार्च माह से लेकर जो फंड स्कूलों ने नहीं वसूला है, उसे लेने की छूट भी प्राइवेट स्कूलों को होगी। हालांकि इस दौरान स्कूल प्रबंधन को फीस न देने वाले अभिभावकों पर एकदम से ज्यादा दबाव नहीं डालना होगा। वहीं इस संक्रमण के दौर में फीस न देने पर किसी भी छात्र का नाम स्कूल से न काटने के आदेश भी सरकार ने दिए हैं। बता दें कि सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह राहत प्राइवेट स्कूलों को दी है। अब प्राइवेट स्कूल लाइब्रेरी फंड, सिक्योरिटी, लैब, बिल्ंिडग, व अन्य फंडों को भी ले सकेंगे। अब जब सरकार ने छूट दे दी है, तो सभी फंड शामिल होकर बिल बनाए जाएंगे।

बता दें कि 27 अक्तूबर को कैबिनेट की बैठक में प्राइवेट स्कूलों को फीस लेने के मामले पर सरकार ने मंजूरी दी थी। इससे पहले 25 मई को कोरोना संकट के चलते सरकार ने निजी स्कूलों से सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली को कहा था। प्रदेश के निजी स्कूलों के दबाव में आकर अक्तूबर के पहले सप्ताह में उच्च शिक्षा निदेशालय ने फीस को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का सरकार को प्रस्ताव भेजा था। शिक्षा विभाग ने सरकार से पूछा था कि सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली का फैसला जारी रखना है या इसे वापस ले लिया जाए। पिछली कैबिनेट बैठक में शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। सरकार ने निजी स्कूलों के दबाव के आगे झुकते हुए सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले में स्पष्ट है कि अगर कोई अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम नहीं है, तो उसे स्कूल को लिखित में इसकी जानकारी देनी होगी। स्कूल प्रबंधन को एक कमेटी बनाकर इस तरह के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना होगा। अब हाई कोर्ट में फीस को लेकर चल रहा केस भी बंद हो गया। मंगलवार को सरकार ने कैबिनेट के फैसले के बारे में हाई कोर्ट को अवगत करवाया।