लिंचिंग मुद्दे पर संघ प्रमुख का कड़ा संदेश

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लिंचिंग को लेकर देश को बदनाम किए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि लिंचिग’ शब्द की शुरूआत भारतीय लोकाचार से नहीं है, ऐसे शब्दों को भारतीयों पर नहीं थोपा जाना चाहिए। संघ प्रमुख ने नागपुर में विजयदशमी के मौके पर स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आज विजयादशमी के मौके पर ‘शस्त्र पूजा’ की। इस मौके पर स्वयंसेवकों के पथ संचलन के बाद संघ के बैंड ने प्रस्तुति दी। दशहरे का पर्व संघ के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि इसी दिन 1925 में संगठन की स्थापना हुई थी। इस वार्षिक समारोह में एचसीएल के संस्थापक शिव नादर मुख्य अतिथि थे। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस भी इस सामारोह में मौजूद रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश की सुरक्षा व्यवस्था, भारतीय सेना की तैयारी और सुरक्षा नीति के मोर्चे पर भी केंद्र सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करके वर्तमान सरकार ने एक बार फिर साबित किया कि उसमें राष्ट्रहित में जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति करने का साहस है

उन्होंने कहा कि सामाजिक हिंसा की कुछ घटनाओं को लिंचिंग बताकर, भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। संघ का नाम लिंचिंग की घटनाओं से जोड़ा गया जबकि संघ के स्वयंसेवकों का ऐसी घटनाओं से कोई संबंध नहीं है।

महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख ने कहा, महिलाओं को समाज में अपना उचित स्थान दिया जाना चाहिए और ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में सद्भावना, संवाद और सहयोग बढ़ाने के प्रयास में प्रयासरत होना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के मौके पर ‘शस्त्र पूजा’ की. इस मौके पर स्वयंसेवकों के पथ संचलन के बाद संघ के बैंड ने प्रस्तुति दी. एचसीएल के संस्थापक शिव नादर इस साल आयोजन के मुख्य अतिथि थे। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जनरल वी के सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस उपस्थित थे।