भद्रवाह का ऐतिहासिक ‘मेला पट’ सम्पन

जम्मू कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट ने यहां तीन दिवसीय प्राचीन धार्मिक भाद्रवाह मेले ‘मेला पट’ का आज समापन हो गया है । इसमें शारीरिक दूरी और अन्य कोविद-19 मानकों का पालन किया गया। यह मेला भगवान वासुकि नाग को समर्पित है, जो भद्रवाह घाटी के प्रमुख देवता हैं और हर साल नाग पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह हर साल नाग पंचमी पर मोहल्ला खाखल, गणेश मंदिर और मोहल्ला वासक डेरा परिसर में मनाया जाता है।

हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के सदस्य पारंपरिक त्योहार में भाग लेते है, जो भद्रवाह के पुराने रीति-रिवाजों, परंपरा और आतिथ्य, मेलों और त्योहारों की सदियों पुरानी संस्कृति का प्रतीक है। इस अवसर पर, इस वर्ष मेले में कुछ ही लोगों को पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई जो मेला पट्ट से जुड़े हैं। प्रशासन ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सीमित संख्या में लोगों को इस आयोजन में भाग लेने की अनुमति दी है।

धर्मार्थ ट्रस्ट हर साल कैलाश यात्रा के समापन पर यह मेला मनाता है। इस मेले की शुरुआत सबसे पहले राजा नागपाल ने 16वीं शताब्दी में उस भद्रकश रियासत के शासक के रूप में की थी जिसे अब भद्रवाह कहा जाता है। कोविद-19 सावधानियों के बीच अनुष्ठान करने में आवश्यक अनुमति देने के लिए धर्मार्थ ट्रस्ट के अधिकारियों ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। यह त्योहार न केवल धर्म का प्रतीक है, बल्कि गर्व की अनूठी विरासत और आपसी भाईचारे को भी दर्शाता है। ट्रस्ट के एक अधिकारी ने कहा कि शायद यह भारत में एकमात्र त्योहार है जो पिछले 600 वर्षों से किसी भी अप्रिय या अवांछित घटना के बिना मनाया जा रहा है जो कि स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र के सांप्रदायिक सद्भाव को स्पष्ट करता है।